06 April, 2025 (Sunday)

Farmers Protest: झारखंड में MSP पर सिर्फ 10% बिकता है धान, यहां कृषि कानून को लेकर इत्‍मीनान हैं किसान

Farmers Protest कृषि सुधार को लेकर बने नए कानून और उस पर छिड़ी बहस का दायरा चर्चा का विषय हो सकता है। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की जायज मांग पर भी पक्ष-विपक्ष में बहस हो सकती है। एमएसपी पर खरीद किसानों के हित में भी है, लेकिन झारखंड जैसे राज्य में एमएसपी पर खरीद के पिछले कुछ सालों के आंकड़े किसानों को निराश कर रहे हैं।

राज्य की मुख्य फसल धान को छोड़कर एमएसपी पर किसी भी फसल की खरीद होती भी नहीं है। और इसका दायरा भी कुल उत्पादन के महज दस फीसद के दायरे में सिमटा हुआ है। मंडी व्यवस्था हमारे राज्य में प्रभावी भी नहीं है। यही वजह है कि झारखंड में किसान नए कृषि कानून का विरोध नहीं कर रहे हैं। नए कानून का समर्थन करने वालों की संख्या भी कम नहीं है।

राज्य में धान के कुल उत्पादन और धान की एमएसपी पर खरीद का यदि आकलन करें तो सब कुछ स्वत: स्पष्ट हो जाता है। वर्ष 2018-19 में सुखाड़ के बावजूद राज्य में 28.94 लाख टन धान का उत्पादन हुआ, लेकिन इसके सापेक्ष राज्य सरकार की एजेंसियों के माध्यम से महज 2.27 लाख टन की ही खरीद की जा सकी। जो कि दस फीसद से कम है। वर्ष 2019-20 में 34 लाख टन धान का उत्पादन हुआ। इसके सापेक्ष खरीद 3.24 लाख क्विंटल रही। यह भी कुल उत्पादन के दस फीसद से कम रहा।

जाहिर है, राज्य के किसानों को एमएसपी का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। सरकार की एजेंसियों ने भी अपने धान खरीद के दायरे को दस फीसद के भीतर ही सिमटा रखा है। गत वित्तीय वर्ष लक्ष्य ही तीन लाख टन खरीद का रखा गया। धान हो या कोई अन्य प्रमुख फसल राज्य के किसान बिचौलियों के चंगुल में ही फंसे हुए हैं। नया कृषि कानून कुछ हद तक बिचौलियों पर अंकुश लगाएगा और निजी कंपनियों और किसानों के बीच एक अच्छा रिश्ता कायम करेगा। यह किसानों के हितों में ही होगा। राज्य के प्रगतिशील किसान इस बात को बखूबी समझ रहे हैं। यही वजह है कि नए कृषि कानूनों को लेकर विरोध का स्वर झारखंड में नहीं उठ रहा है।

एक स्वर में बोले किसान, कानून हमारे हित में

कृषि कानून किसानों के हित में है। इससे सबसे अधिक परेशानियां बिचौलियों को हो रही है। यही वजह है कि कुछ लोग किसानों को गलत जानकारी देकर उन्हें दिग्भ्रमित कर बहकाने का काम कर रहे हैं। नए कानून से किसानों को बेहतर लाभ होने वाला है।-बालेश्वर यादव, पपहरा, मरकच्चो

कृषि कानून से सीधा-सीधा लाभ किसानों को होने वाला है। यही वजह है कि कुछ लोग किसानों को उकसा कर अपनी रोटी सेकना चाह रहे हैं, परंतु किसान सारी बातों को जान रहे हैं। यह कानून किसानों के लिए बेहतर है। इस कानून से किसान आत्मनिर्भर बनेंगे। उनकी आय दोगुनी होगी। किसान अपनी उत्पादों को कहीं भी बेच सकेंगे। -बालेश्वर ठाकुर, मरकच्चो।

किसानों के समक्ष सबसे बड़ी समस्या समय पर उनके उत्पादों का सही मूल्य नहीं मिल पाना है। नए कानून में कांटेक्ट फार्मिंग की बातें की गई हैं, जो खेती को नई दिशा देगी। इस कानून से किसान बुआई के पहले ही अपने उत्पाद का मूल्य तय कर सकेंगे। इससे हानि की संभावना काफी कम होगी। कानून को लेकर विवाद पूरी तरह अनुचित है। कानून किसानों को सशक्त बनाने वाला है। -किसान अजय साव, चंदवारा।

 

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