किराए पर रहना है क्या है या EMI पर घर खरीदना फायदे का सौदा?



नई दिल्ली। मकान लेने के लिए आपको अपने जरूरत को पहचानने की जरूरत है। अगर आप इस नतीजे तक पहुंचते हैं कि आपको अब लंबे समय तक उसी शहर में रहना और आपने मार्जिन मनी इकट्ठा कर लिया है तो आपको अपना मकान लेने के बारे में सोचना चाहिए।
अपनी जरूरत को पहचानना है जरूरी
अगर आप अपने गृह शहर या गांव से दूर जाकर नौकरी कर रहे हैं, तो बहुत संभव है कि आप अपने करियर के शुरुआती दिनों में मकान लेने के बारे में नहीं सोचते हैं। लेकिन धीरे-धीरे जब एक तरह की स्टैबिलिटी आती है तो आप इस बारे में सोचने लगते हैं। मकान लेने के लिए आपको अपनी जरूरत को पहचानने की जरूरत है। अगर आप इस नतीजे तक पहुंचते हैं कि आपको अब लंबे समय तक उसी शहर में रहना और आपने मार्जिन मनी इकट्ठा कर लिया है तो आपको अपना मकान लेने के बारे में सोचना चाहिए। अगर आपके जॉब में एक तरह का स्थायित्व आ गया है और मार्जिन मनी इकट्ठा हो गया है तो आपको रेंट पर रहने और EMI पर मकान लेने के विकल्पों की तुलना नहीं करनी चाहिए। क्योंकि ऐसे केस में मकान खरीदना हमेशा फायदे का सौदा होता है।
EMI पर मकान लेने के कई फायदे
भारत में अपने घर को हमेशा ‘सपनों का घर’ कहा जाता है। इसकी कई तरह की वजहें हैं। अगर आप EMI पर मकान लेते हैं तो आपके जीवन जीने का तरीका और बेहतर हो जाता है। इसकी वजह है कि आप फर्नीचर से लेकर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण तक यह सोच कर लेते हैं कि आपको अपनी रिहाइश को चेंज नहीं करना है। आप इसी माइंडसेट के साथ घर में इंटीरियर करवाते हैं। इस तरह आपको बार-बार मकान चेंज करने से राहत मिल जाती है क्योंकि किराये पर बार-बार घर बदलने पर आपको कई सारे खर्च करने पड़ते हैं। मसलन, पैकर्स एंड मूवर्स का खर्च और नए मकान में अपनी जरूरत के हिसाब से खर्च। आपको बार-बार अपने डॉक्युमेंट्स में एड्रेस में भी बदलाव नहीं करना पड़ता है। यह काफी सुकून भरी चीज है।
टैक्स में मिलने वाली छूट अहम
होम लोन पर मकान लेने पर आपको टैक्स में काफी अधिक छूट मिलती है। फ्लैट का पजेशन मिलने के बाद आपको आयकर अधिनियम के Section 24(B) के तहत Self Occupied होम पर लिए गए लोन के अगेंस्ट ब्याज पर टैक्स देनदारी में सालाना दो लाख रुपये तक की छूट मिलती है। इतना ही नहीं, अगर पति-पत्नी ने संयुक्त रूप से मकान लिया है और दोनों नौकरी करते हैं तो दोनों अलग-अलग इस छूट का लाभ उठा सकते हैं।
इसके साथ ही आपको मूलधन पर सेक्शन 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक की टैक्स छूट मिल जाती है। इसका मतलब है कि आपको सेक्शन 80C के तहत टैक्स छूट का लाभ लेने के लिए अलग से निवेश करने की जरूरत नहीं होती है।
प्रॉपर्टी के वैल्यू में Appreciation
अगर आप किसी रेंटेड मकान में 20 साल में रहते हैं तो उसके लिए दी गई रेंट एक तरह से आपके खर्च में शामिल होकर रह जाती है। वहीं, अगर आप 20 साल तक EMI का भुगतान करते हैं तो आप इस तरह से एक प्रोपर्टी तैयार करते हैं। अगर आप सोच-समझकर और पूरी रिसर्च के बाद सही प्रोपर्टी पर दांव लगाते हैं तो समय के साथ-साथ आपके मकान की कीमत भी बढ़ती है जिसका फायदा भी आपको मिल जाता है।
किन परिस्थितियों किराये पर में रहना फायदेमंद
अगर आप किसी ऐसी नौकरी में हैं, जिसमें बार-बार तबादला होता है, तो आपको किराये पर रहने में ही फायदा है। क्योंकि किराये पर रहने से आपको दूसरे शहर में कोई बेहतर ऑप्शन मिलने पर जॉब बदलने में कोई खास परेशानी नहीं होती है। यह आपको काफी फ्लैक्सेबिलिटी देता है। आप अपनी जरूरत के हिसाब से ज्यादा बड़ा या छोटा मकान ले सकते हैं। अगर आपके पास मार्जिन मनी नहीं है या जॉब सिक्योरिटी को लेकर किसी तरह का संदेह है तो ऐसे मामलों में किराये पर रहना ही ज्यादा मुनासिब होता है।