Coronavirus Vaccine Update: जानिये- किसे सता रहा है कोरोना वैक्सीन की डोज से राज खुलने का डर



Coronavirus Vaccine Update: कोरोना वायरस संक्रमण का टीका जल्द आने की उम्मीद में तैयारियां जोरों पर हैं। पहले चरण में सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ निजी अस्पतालों और छोटे क्लीनिकों के डॉक्टरों व कर्मचारियों को भी टीके लगने हैं। इसलिए सभी अस्पतालों, नर्सिंग होम व क्लीनिक से कर्मचारियों का डाटा स्वास्थ्य विभाग एकत्रित कर रहा है। चर्चा है कि मध्यम व छोटे स्तर के नर्सिंग होम सभी कर्मचारियों का डाटा उपलब्ध कराने से बच रहे हैं। उन्हें डर सता रहा है कि कोरोना के टीके की डोज के चक्कर में कहीं उनके कई राज सरकार के पास न पहुंच जाएं। उन्हें यह भी डर है कि कर्मचारियों की वास्तविक संख्या की जानकारी देने के बाद कर्मचारियों को कई ऐसी सुविधाएं देने के लिए उन पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे वे अब तक बचते रहे हैं। इसलिए कई नर्सिंग होम ने कर्मचारियों की संख्या कम करके भी बताई है। वैसे यह डर बेवजह ही है।.
हाल ही में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ने सुपर स्पेशियलिटी में दाखिले के लिए परिणाम घोषित किया, जिसे देखकर कई के अरमान धरे के धरे रह गए। यूरोलॉजी की लिखित परीक्षा में 73.75 फीसद अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहे डॉक्टर को साक्षात्कार में 20 में महज तीन अंक से संतोष करना पड़ा, इसलिए उन्हें किसी एम्स में दाखिले के योग्य नहीं पाया गया। वहीं, 65 व 60 फीसद अंक पाने वालों पर फैकल्टी ने साक्षात्कार में दिल खोलकर अंक लुटाए। पल्मोनरी मेडिसिन की सीट भी लिखित परीक्षा में शीर्ष पर रहे अभ्यर्थी को इसलिए नहीं मिल पाई, क्योंकि वह साक्षात्कार में पिछड़ गए थे। वहीं, लिखित परीक्षा में पिछड़ने वाले साक्षात्कार के अंक के दम पर सीट पा गए। कुछ डॉक्टर कहते हैं कि यह सिर्फ एक दो विभागों की बात नहीं है। किसी खास को आगे करने के लिए अंकों की बाजीगरी से कुछ प्रतिभावान अक्सर पीछे धकेल दिए जाते हैं।
पीजीआइ के मॉडल की दरकार
एम्स सुपर स्पेशियलिटी में दाखिले का फाइनल परिणाम देखकर कई युवा डॉक्टर आहत हैं। उनका दिल कचोट रहा है। वे कहते हैं कि कुछ तो गड़बड़ है, लेकिन कोई खुलकर आवाज उठाने के लिए तैयार नहीं है। यह भी तब जब इसके भुक्तभोगी रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (आरडीएम) से जुड़े हैं। युवा डॉक्टरों को यह डर सता रहा है कि यदि वे अभी आवाज उठाएंगे तो आगे चलकर उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इसलिए खामोशी से झेल जाना ही बेहतर है। हालांकि, अंदरखाने वे सवाल उठा रहे हैं। वे कहते हैं कि राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख संस्थानों में सुपर स्पेशियलिटी में दाखिले के लिए एक साथ परीक्षा हुई थी। पीजीआइ चंडीगढ़ अलग से साक्षात्कार नहीं लेता, जबकि एम्स परीक्षा के बाद अलग से साक्षात्कार लेता है। लिखित परीक्षा ऑनलाइन होती है। इसलिए उसमें हेराफेरी की संभावना नहीं है। एम्स भी पीजीआइ चंडीगढ़ का मॉडल अपनाए तो शक की गुंजाइश नहीं रहेगी।
आइएमए को नहीं मिला डीएमए का साथ
आयुर्वेद के डॉक्टरों को कुछ खास तरह की सर्जरी करने की स्वीकृति मिलना इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) को हजम नहीं हुआ। इसके बाद एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने विरोध का झंडा उठाते हुए अस्पतालों में एक दिन की हड़ताल भी घोषित कर दी, लेकिन उसे अपने ही सहयोगी संगठन दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन (डीएमए) का साथ नहीं मिला। सरकार का फैसला डीएमए को भी पसंद नहीं है, लेकिन डीएमए ने फिर भी हड़ताल से दूरी बनाकर रखी। इससे पहले राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान अयोग (एनएमसी) के मुद्दे पर भी डीएमए ने अंतिम समय में आइएमए को गच्चा दे दिया था। इस बार भी कुछ वैसा ही हुआ। रेजिडेंट डॉक्टरों ने काली पट्टी बांधकर विरोध जरूर जताया लेकिन हड़ताल के लिए आइएमए के साथ वे भी खड़े नहीं हुए। इसलिए हड़ताल के जरिये सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति काम नहीं आई। अब एसोसिएशन द्वारा नए सिरे से आगे की रणनीति बनाई जा रही है।