06 June, 2026 (Saturday)

3 जून: वो तारीख जब हमेशा के लिए बदल गया भारत का नक्शा

3 जून एक ऐसी तारीख है जिसने भारत के इतिहास और भूगोल दोनों को बदल दिया. 3 जून 1947 यानी आज ही के दिन भारत के दो टुकड़े करने का ऐलान हुआ था. अंतिम वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन ने भारत विभाजन का खाका पेश करते हुए ऐलान किया कि बंटवारे के बाद पाकिस्तान नाम से एक अलग मुल्क बनेगा. उनके प्लान को ‘माउंटबेटन प्लान’ या ‘3 जून की योजना’ के नाम से भी जाना जाता है.

क्यों पड़ी माउंटबेटन प्लान की जरूरत?
अंग्रेजी हुकूमत ने फरवरी 1947 में ही भारत को आजादी देने का ऐलान कर दिया. पर आजादी की रूपरेखा क्या होगी, इस पर कोई फैसला नहीं हो पा रहा था. आखिरकार वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन को सब तय करने की जिम्मेदारी सौंपी गई. उस वक्त देश के तमाम हिस्सों में दंगे हो रहे थे, मुस्लिम लीग अलग देश की मांग पर अड़ी थी और गांधी का स्वास्थ्य बिगड़ता जा रहा था.

3 जून को क्या हुआ?
माउंटबेटन ने महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और पटेल से लेकर कांग्रेस के तमाम नेताओं और जिन्ना जैसे मुस्लिम लीग के नेताओं के साथ कई दौर की बातचीत के बाद एक प्लान तैयार किया. 2 जून 1947 माउंटबेटन ने भारत के प्रमुख नेताओं से उस प्लान पर विस्तार से बात की. 3 जून 1947 को माउंटबेटन जवाहरलाल नेहरू, मोहम्मद अली जिन्ना और सिख समुदाय के प्रतिनिधि बलदेव सिंह के साथ ऑल इंडिया रेडियो पहुंचे और वहां अपनी योजना की सिलसिलेवार जानकारी दी.

माउंटबेटन प्लान में क्या था?
‘माउंटबेटन प्लान’ के मुताबिक भारत को दो हिस्सों में विभाजित करने के बाद पाकिस्तान के नाम से एक नया देश बनना था. पाकिस्तान के लिए एक नए संविधान सभा का गठन किया जाना था. सबसे प्रमुख प्रावधानों में भारत और पाकिस्तान को डोमिनियन दर्जा देना था, जिसकी तारीख 15 अगस्त 1947 तय की गई थी. इसी प्लान में देशी रियासतों को छूट दी गई थी कि वह चाहें तो भारत में रहें या पाकिस्तान में शामिल हो जाएं. फैसला उन पर छोड़ दिया गया.

इसी प्लान का एक सबसे अहम हिस्सा सेना का बंटवारा था. साथ ही विभाजन के इलाकों को भी मोटे तौर पर तय किया गया. इसके साथ ही दोनों देशों के विधायी अधिकार, गवर्नर जनरल की शक्तियों को भी परिभाषित किया गया था.

कैसे हुआ सेना का बंटवारा?
‘माउंटबेटन प्लान’ के ऐलान के बाद जुलाई के शुरू में भारतीय सेना के हर अधिकारी को एक फार्म दिया गया. उसमें हर अधिकारी से यह बताने को कहा गया था कि वह भारतीय सेना में काम करेगा या पाकिस्तानी सेना में जाना चाहेगा. इसी तरह बंटवारे के वक्त तय हुआ कि भारत की चल संपत्ति का 80 प्रतिशत भारत को मिलेगा और 20 प्रतिशत पाकिस्तान के हिस्से में जाएगा

सवा करोड़ लोग विस्थापित हुए
बंटवारे (India Partition) में करीब सवा करोड़ लोग इधर से उधर हुए. बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक बंटवारे के बाद जो हिंसा हुई, उसमें करीब 10 लाख लोग मारे गए. हजारों महिलाओं को अगवा कर लिया गया. उनके साथ रेप और जोर जबरदस्ती हुई. बंटवारे को 75 साल से अधिक होने को है, लेकिन आज तक घाव भर नहीं पाया है.

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