सिन्थेटिक दूध पीकर लोग पड़ रहे बीमार



एटा। चिकित्सकों के अनुसार सर्दी का मौसम सेहत बनाने का होता है। इस मौसम में बहुत कम बीमारियां होती हैं, घी खाकर और दूध पीकर इंसान अपनी सेहत बना सकता है, लेकिन इस समय इसके विपरीत काम हो रहा है, दूध पीकर लोग बीमार पड़ रहे हैं चूंकि असली दूध मिल ही नहीं रहा है कहीं भी दूध व घी खरीदो मिटाली मिलता है। सिन्थेटिक दूध से अक्सर बीमारियां होती हैं। अब दूध पीकर सेहत बनाने वाले दिन चले गये हैं। नोनिहालों के साथ खिलवाड हो रही है।
सर्द मौसम में दुग्ध उत्पादन भले ही बढ़ गया हो, इसके बावजूद सिंथेटिक दूध का कारोबार बंद नहीं हुआ। ऐसे दूध से कई बार लोग शहर में बीमार भी पड चुके हैं। सिर्फ डेयरी पर ही सिंथेटिक दूध नहीं खपाया जा रहा, बल्कि दूधिया घरों में दूध बांटने के दौरान ही सिंथेटिक दूध बांटकर निजस्वार्थों की पूर्ति कर रहे हैं। उधर विभाग की स्थिति यह है कि दीपावली के त्योहार पर कार्रवाई करता नजर आया।
इसके पश्चात विभाग द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गयी। मौसम सर्द होने के कारण विभाग पूरी तरह निश्चित है कि अब सिंथेटिक दूध नहीं बल्कि हर किसी को शुद्ध दूध ही मिल रहा है। जबकि हकीकत यह है कि सिंथेटिक दूध का कारोबार अब सिर्फ दूध की किल्लत के दौरान ही नहीं बल्कि हर मौसम का धंधा बन गया है। जिले में सिंथेटिक दूध बनाने वालों ने ग्रामीण अंचलों में अपने कारखाने लगा रखे हैं। शहर में क्रीम निकालने के नाम पर लगे कारखानों पर भी सिंथेटिक दूध बनाकर बेचा जा रहा है।
सिंथेटिक दूध के खिलाफ जिला प्रशासन की ओर से कोई विशेष अभियान नहीं चलाया गया है। दो-चार दूधियों के खिलाफ कार्रवाई करके खानापूरी की जाती है। यदि एक बार सिंथेटिक कारोबारी अच्छी तरह दंडित हो जायें तो जन स्वास्थ्य से खिलवाड़ रुक सकेगा। सिंथेटिक दूध में पानी, साबुन, सोडियम हाइड्रोआक्साइड, वनस्पति तेल, नमक, यूरिया आदि मिला होता है। रिफाइंड ऑयल फैट का कार्य करता है। एक लीटर सिंथेटिक दूध की लागत चार से पाच रुपए आती है। इसे क्रीम निकले दूध में मिलाकर बिक्री को भेजा जाता है।