लगभग 736 खरब रुपये की रिश्वत और इससे दोगुनी रकम की चोरी! इसके बारे में क्या कहेंगे आप



भ्रष्टाचार पूरी दुनिया में सबसे बड़ी समस्या है। इसकी जड़ें कितनी गहराई तक पहुंची हुई हैं इसका अंदाजा तब होता है जब हमें इसकी रकम का अंदाजा होता है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक पूरी दुनिया में 7,35,98,50,00,00,000 रुपये (1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर ) हर वर्ष रिश्वत के रूप में दिए जाते हैं। वहीं 19,13,47,00,00,00,000 रुपयों की (2.6 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर) विभिन्न माध्यमों से चोरी की जाती है। यूएन के मुताबिक भ्रष्टाचार की ये रकम विकासशील देशों द्वारा विकास के नाम पर खर्च की जाने वाली रकम से करीब दस गुना अधिक है।
इसमें कोई संदेह नहीं है कि भ्रष्टाचार मुक्त समाज के बिना एक विकास और समृद्ध राष्ट्र की कल्पना नहीं की जा सकती है। यही वजह है कि यूएन ने इसके खिलाफ एकजुट होकर लड़ाई लड़ने की जरूरत महसूस की। इसी मकसद को पूरा करने के लिए हर वर्ष 9 दिसंबर का दिन इंटरनेशनल एंटी करप्शन डे के रूप में मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का सबसे बड़ा मकसद यही है कि दुनिया को इसके बारे में जागरुक किया जाए और इस वैश्विक बीमारी को जड़ से खत्म किया जा सके।
यूएन ने वर्ष 2020 के लिए जो थीम रखी है उसको यूनाइटेड अगेंस्ट करप्शन का नाम दिया गया है। इस बार की ये थीम अगले साल के एजेंडे को भी सपोर्ट करती है, जिसका मकसद इस भ्रष्टाचार को खत्म करने की मुहीम में अधिक से अधिक युवाओं का साथ में लाना है। संयुक्त राष्ट्र का मानना है कि युवाओं का अधिक संख्या में साथ आना भ्रष्टाचार को खत्म करने में मदद कर सकता है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटारेस ने इस मौके पर दिए अपने संदेश में कहा है कि भ्रष्टाचार एक अपराध है। ये अनैतिक होने के साथ लोगों का विश्वास भी खोता है। वक्त के साथ इसकी समस्या भी बढ़ती ही जाती है जैसा की अब कोविड-19 महामारी के दौरान महसूस किया जाने लगा है। इस महामारी ने दुनिया को एक नया मौका दिया है कि भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए हम सब मिलकर प्रयास करें और अपने काम में अधिक से अधिक पारदर्शिता बरतें।
आपको यहां पर ये भी बता दें कि कुछ ही समय पहले दुनिया के देशों में फैले भ्रष्टाचार के ऊपर ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की रिपोर्ट आई थी। इसमें डेनमार्क इससे पूरी तरह से मुक्त देश था। इसके बाद फिनलैंड नंबर 3 पर , स्वीडन और स्विटजरलैंड नंबर 4 पर , नॉर्वे नंबर 7 पर , नीदरलैंड 8 और जर्मनी 9 नंबर पर था।