मेनका या वरुण में से किसी एक को ही टिकट मिलेगा।



लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा के प्रत्याशियों की पहली सूची में वंचित रहने के बाद पार्टी के दिग्गज सांसदों ने अपने टिकट के लिए पूरा दम लगा दिया है। राम लहर और मोदी की गारंटी के माहौल में भी दिग्गज चेहरों को चुनाव मैदान से बाहर करने में पार्टी को मशक्कत करनी पड़ेगी।
भाजपा ने पहले चरण में यूपी की 80 में से 51 सीटों पर प्रत्याशी घोषित किए हैं। शेष 29 सीटों में से बागपत और बिजनौर पर एनडीए के सहयोगी राष्ट्रीय लोक दल ने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। आगामी दिनों में 27 सीटों पर प्रत्याशी घोषित होने हैं। इनमें से दो सीटें अपना दल (एस) और सुभासपा को एक सीट मिलेगी।
24 सीटों पर भाजपा अपने प्रत्याशी उतारेगी। जिन मौजूदा सांसदों के टिकट घोषित नहीं हुए हैं, वह अपने समर्थकों के साथ लखनऊ से दिल्ली तक प्रयास कर रहे हैं। जानकार बताते हैं कि कुश्ती संघ से विवादों में आए कैसरगंज से भाजपा सांसद ब्रजभूषण शरण सिंह की जगह पार्टी उनकी पत्नी केतकी सिंह या विधायक बेटे प्रतीक भूषण सिंह को चुनाव लड़ाना चाहती है।
लेकिन ब्रजभूषण ने टिकट पाने के लिए लखनऊ से दिल्ली तक पूरी ताकत लगा दी है। बरेली से लगातार सांसद रहे संतोष गंगवार को 2019 में मंत्री पद से हटाने के बाद अब चुनावी राजनीति से बाहर रखने की चर्चाएं चल रही हैं। उनके समर्थकों का तर्क है कि 75 वर्ष से अधिक आयु होने पर हेमा मालिनी को टिकट दिया गया है, ऐसे में संतोष गंगवार की दावेदारी भी से बनती है।