06 June, 2026 (Saturday)

किडनी ही नहीं दिल और दिमाग को भी बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचाती है डायबिटीज़ की समस्या

जब किसी एक बीमारी वजह से व्यक्ति को कुछ अन्य स्वास्थ्य समस्याएं परेशान करने लगती हैं तो उन्हें शैडो डिजीज़ कहा जाता है। डायबिटीज़ भी एक ऐसी ही समस्या है, जिसे कुछ अन्य गंभीर रोगों के लिए जि़म्मेदार माना जाता है।

हृदय-रोग के लिए जि़म्मेदार

डायबिटीज़ के मरीज़ों में लगभग 70 प्रतिशत लोग ऐसे हैं, जिन्हें आबेसिटी, हाई कोलेस्ट्रॉल और ब्लडप्रेशर जैसी समस्याएं भी होती हैं। इसी वजह से उनके हृदय की रक्तवाहिका नलियों यानी आर्टरीज़ की भीतरी दीवारों में कोलेस्ट्रॉल जमा होने लगता है, जिससे वे संकरी हो जाती हैं और रक्त प्रवाह में रुकावट पैदा होती है। नतीजतन शरीर के सभी हिस्सों तक ऑक्सीजन युक्त शुद्ध रक्त पहुंचाने के लिए हार्ट को ज्य़ादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे धीरे-धीरे शरीर का यह महत्वपूर्ण अंग कमज़ोर पडऩे लगता है। इसी वजह से आर्टरी ब्लॉकेज, हार्ट फेल्योर, अरिद्मिया और हार्ट अटैक जैसी गंभीर समस्याएं भी होती हैं।

ब्रेन के लिए नुकसानदेह

डायबिटीज़ होने पर जिस तरह दिल की रक्तवाहिका नलियों में कोलेस्ट्रॉल या अन्य नुकसानदेह तत्वों का जमाव होता है, उसी तरह ब्रेन की नर्व्स में भी ब्लॉकेज का खतरा रहता, जिससे व्यक्ति को ब्रेन स्ट्रोक हो सकता है। नतीजतन कई बार शरीर के कुछ हिस्से काम करना बंद कर देते हैं। इससे मेमोरी लॉस जैसी समस्या भी हो सकती है। डायबिटीज़ के मरीज़ चूंकि खानपान में नियंत्रण और दवाओं की मदद लेते हैं। इसलिए कई बार देर तक खाली पेट रहने या कुछ अन्य कारणों से उनका शुगर लेवल अचानक बहुत कम हो जाता है, जिससे उन्हें चक्कर आने लगते हैं और उसकी आंखों के आगे अंधेरा छा जाता है। शुगर लेवल लो होने पर मरीज़ कोमा में चला जाता है और कई बार यह स्थिति जानलेवा साबित होती है।

प्रभावित होती है किडनी

किडनी फिल्टर की तरह ब्लड को छान कर साफ करने का काम करती है, लेकिन डायबिटीज़ होने पर ब्लड में बढ़ी हुई शुगर की मात्रा धीरे-धीरे किडनी की बारीक रक्तवाहिका नलियों को नष्ट करने लगती है। जिससे इसकी कार्यक्षमता में गिरावट आने लगती है। विज्ञानियों द्वारा किए गए रिसर्च में यह पाया गया है कि लगभग 40 प्रतिशत लोगों की किडनी केवल डायबिटीज़ की वजह से ही खराब होती है। ऐसी समस्या को डायबिटिक नेफ्रोपैथी कहा जाता है। ऐसे में सूजन जैसे लक्षण दिखाई देते हैं क्योंकि तरल पदार्थ के रूप में नुकसानदेह तत्व शरीर के भीतर जमा होने लगते हैं।

 

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