06 June, 2026 (Saturday)

बिहार चुनाव: तेजस्वी का मिशन सीमांचल, मुस्लिम वोटरों को साधने की कोशिश, टारगेट पर ओवैसी

सीमांचल क्षेत्र में पिछले विधानसभा चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM इंडिया गठबंधन को काफी नुकसान पहुंचाया था. यही वजह है कि इस बार आरजेडी नेता मुस्लिम बहुल इस इलाके में खास फोकस कर रहे हैं. वो ओवैसी को वोट कटवा बता रहें हैं, साथ ही उन्होंने वक्फ बिल को लेकर भी बड़ी बात की है.
बिहार में विधानसभा चुनाव के लिए चुनाव प्रचार जोर पकड़ चुका है. पक्ष और विपक्ष के तमाम नेता जनता से बड़े-बड़े दावे और वादे कर रहे हैं. सीमांचल की 24 सीटों पर एनडीए और महागठबंधन के अलावा AIMIM की खास नजर है.आरजेडी नेता तेजस्वी यादव महागठबंधन के कुनबे के साथ इस बार सीमांचल में पहले से सीमांचल में ज्यादा फोकस कर रहे हैं. सीमांचल क्षेत्र सूबे में सत्ता बनाने और बिगाड़ने में अहम भूमिका निभाता है, यही वजह है कि यह इलाका हर किसी के लिए खास माना जाता है.
सीमांचल के जिला कटिहार में दूसरे चरण में 11 नवंबर को मतदान होना है. ऐसे में आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने वोटरों को साधने की तैयारी तेज कर दी है. आज (रविवार 26व अक्टूबर) को कटिहार जिले की प्राणपुर विधानसभा सीट से आरजेडी उम्मीदवार के इशरत परवीन के पक्ष में तेजस्वी ने आजमनगर थाना मैदान में एक जनसभा को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने यह साफ कर दिया कि इस बार सीमांचल में महागठबंधन और खासकर आरजेडी का प्रचार अभियान का अंदाज क्या होगा.
AIMIM की सेंधमारी से महागठबंधन को नुकसान
समुदाय विशेष के वोट बैंक में ओवैसी की पार्टी AIMIM की सेंधमारी के कारण पिछली बार इस इलाके में महागठबंधन को खासा नुकसान हुआ था, ऐसे में आरजेडी इस बार यहां ज्यादा तवज्जो दे रही है. ताकि मुस्लिम वोट बैंक को अपने पक्ष में किया जा सके. यही वजह है कि तेजस्वी सीधे तौर पर अब वक़्फ़ बिल को कूड़ेदान में फेंकने की बात कर रहे हैं. अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि मुस्लिमों की मर्जी के खिलाफ जो कानून वक्फ बिल बीजेपी लाई है, हमारी सरकार बनने पर उसे कूड़ेदान में फेंक देंगे.

तेजस्वी के निशाने पर ओवैसी
तेजस्वी यादव आरएसएस-बीजेपी को सभा स्थल से ही सीधे चुनौती देने के साथ-साथ ओवैसी को वोट कटवा पार्टी बता रहे हैं. तेजस्वी के इस अंदाज के पीछे की वजह पिछली बार सीमांचल में ओवैसी कि सेंधमारी है, जिसकी वजह से आरजेडी को यहां पर नुकसान हुआ था. यही वजह है कि सीमांचल में अपने पहले ही भाषण से इस बार तेजस्वी समुदाय विशेष के साथ साथ एम. वाई (मुस्लिम-यादव) समीकरण को मजबूत करने की कोशिश कर रहे है.

मुस्लिम आबादी और पिछड़े वर्गों की बड़ी आबादी
सीमांचल क्षेत्र, जहां मुस्लिम आबादी और पिछड़े वर्गों की बड़ी हिस्सेदारी है. लंबे वक्त से यहां विपक्ष का प्रभाव रहा है. साल 2020 के चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM की वजह से यहां बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी. यहां 40 से 70 फीसदी तक मुस्लिम आबादी है. मुस्लिम वोटों के दम पर ही ओवैसी ने इंडिया गठबंधन का खेल बिगाड़ दिया था, जिससे फायदा बीजेपी को मिला. सीमांचल के अररिया,किशनगंज,पूर्णिया और कटिहार जिले के 24 सीटों पर 2020 के विधानसभा चुनाव में एनडीए 12, महागठबंधन 7 और AIMIM ने 5 सीटों पर जीत हासिल कर सीमांचल की सियासत में एक नई इबारित लिखी थी. पिछले चुनाव में AIMIM ने महागठबंधन को सीमांचल में भारी नुकसान पहुंचाया था.

2020 विधानसभा चुनाव के परिणाम
बीजेपी ने 8 सीटें जीतीं. कांग्रेस ने 5 सीटें जीतीं. AIMIM 5 सीटें जीतीं JDU ने 4 सीटें, CPIML और RJD ने 1-1 सीट जीती.

सीमांचल में दूसरे चरण में चुनाव
इस बार सीमांचल में दूसरे चरण में चुनाव होंगे. यह क्षेत्र (कुल 24 विधानसभा सीटें) राज्य की राजनीति में एक निर्णायक भूमिका निभाता है. यह क्षेत्र चार जिलों किशनगंज (4 सीटें), अररिया (6 सीटें), कटिहार (7 सीटें) और पूर्णिया (7 सीटें) में फैला हुआ है. यहां मुस्लिम आबादी लगभग 47% है, जो राज्य के औसत 17% से काफी ज्यादा है. मुस्लिम आबादी के अलावा यादव और अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) भी यहां के महत्वपूर्ण मतदाता हैं. राजनीतिक रूप से यह क्षेत्र किसी एक दल के वर्चस्व में नहीं रहा है. RJD-कांग्रेस (महागठबंधन) को पारंपरिक रूप से मजबूत मुस्लिम-यादव समर्थन प्राप्त है, जबकि बीजेपी भी यहां सीटों पर जीत दर्ज कर अपनी उपस्थिति मजबूत करती रही है. अब यहां तेजस्वी यादव अपनी मजबूत स्थिती दर्ज कराने के लिए मुस्लिम वोट बैंक को साधने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं.

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