देश में शारीरिक रूप से अशक्त आधे लोग रोजगार के योग्य, टेक्नोलॉजी, बैंकिंग में सबसे ज्यादा जॉब के अवसर: रिपोर्ट
पता लगाना ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अगर सही नीति बनाई जाए और रणनीतिक बदलाव को कारगर किया जाए तो भारत में शारीरिक रूप से अशक्त लोगों को रोजगार मिल सकता है। और उनमें से लगभग आधे लोगों के पास रोजगार पाने की क्षमता है। रिपोर्ट के मुताबिक टेक्नोलॉजी और खुदरा क्षेत्र में शारीरिक रूप से अशक्त लोगों को कौशल प्रशिक्षण देने और रोजगार के अवसर देने में सबसे आगे हैं। इसके अलावा बैंकिंग और वित्तीय सेवा क्षेत्र भी शारीरिक रूप से अशक्त लोगों को रोजगार देने के लिहाज से एक उभरता हुआ क्षेत्र है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लगभग तीन करोड़ शारीरिक रूप से अशक्त (पीडब्ल्यूडी) आबादी है, जिनमें से लगभग 1.3 करोड़ लोग रोजगार के योग्य हैं, लेकिन उनमें से केवल 34 लाख लोग ही संगठित, असंगठित क्षेत्र, सरकार के नेतृत्व वाली योजनाओं और स्वरोजगार में कार्यरत हैं।
शारीरिक रूप से अशक्त लगभग 17,000 छात्र इंजीनियरिंग या कंप्यूटर विज्ञान और संबंधित धाराओं में स्नातक हैं, जिनमें से आईटी सेवा क्षेत्र में ऐसे लगभग 8,000 कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि सॉफ्टवेयर उत्पाद में लगभग 5,500 कर्मचारी कार्यरत हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, ‘देश में 3.4 लाख गैर-तकनीकी स्नातकों, पॉलिटेक्निक और डिप्लोमा धारकों का संभावित श्रमबल है जिसे प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने के लिए कौशल प्रशिक्षण दिया जा सकता है और मुख्यधारा के सेवा क्षेत्र और ज्ञान उद्योग में लगाया जा सकते हैं।’
संगठित खुदरा क्षेत्र में ऐसे 13,000 से अधिक पेशेवर काम रह रहे हैं जबकि टेक्नोलॉजी क्षेत्र में ऐसे कर्मचारियों की संख्या 8,000 से अधिक है।