05 April, 2025 (Saturday)

मालदीव-अमेरिका रक्षा संबंधों से जगी नई उम्मीदें

वर्तमान समय में विश्व के प्रमुख देशों की निगाहें हिंद महासागर क्षेत्र के देशों पर केंद्रित हैं लगातार वैश्विक शक्तियां हिंद महासागर क्षेत्र में स्थित देशों से रक्षा समझौते कर रहे हैं | हाल ही में मालदीव और अमेरिका के बीच रक्षा समझौता संपन्न हुआ है अमेरिका के अलावा चीन भी लगातार इस क्षेत्र में अपनी सक्रियता को बढ़ा रहा है | जिससे भारत का चिंतित होना लाजमी है | हालांकि मालदीव-अमेरिका रक्षा समझौते से भारत को चिंतित होने की जरूरत नहीं है क्योंकि दोनों ही राष्ट्रों से भारत के बेहतर संबंध बने हुए हैं | भारत-मालदीव संबंध अब्दुल्ला यामीन के समय काल में बदहाल स्थिति में था क्योंकि अब्दुल्ला यामीन चीन के समर्थक थे और लगातार अपनी सत्ता के समय चीन कार्ड को खेल कर हिंद महासागर क्षेत्र विशेष में अशांति बढ़ाने में महती भूमिका निभा रहे थे | मौजूदा समय में अब्दुल्ला यामीन जो कि मालदीव के प्रमुख विपक्षी पार्टी के नेतृत्वकर्ता है इस समय जेल में हैं | लेकिन अभी भी जेल से वह भारत विरोधी गतिविधियों को संचालित कर चीन कार्ड को खेल रहे हैं |

मालदीव और अमेरिका के बीच संपन्न हुआ है रक्षा और सुरक्षा समझौता हिंद महासागर क्षेत्र विशेष में शांति और सुरक्षा बरकरार रखने और भागीदारी और सहयोग को बढ़ावा देने में मदद करेगा | सितंबर में संपन्न हुआ यह समझौता मालदीव और अमेरिका के संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाला साबित होगा | हालांकि इस समझौते से पहले वर्ष 2012 में मालदीव के तत्कालीन राष्ट्रपति मोहम्मद वहीद हसन मानिक के समय में स्टेट्स आफ फोर्सेज एग्रीमेंट की बात की गई थी | इस समझौते के संपन्न होने के बाद अमेरिकी सेना को व्यक्तिगत हथियार रखने की छूट मिल जाती और मालदीव में अमेरिकी सेना स्थानीय कानूनों और अदालतों के दायरे में नहीं आती | लेकिन भारी दबाव के कारण यह समझौता नामंजूर कर दिया गया था | अमेरिका ने इस समझौते के लिए श्रीलंका से भी आग्रह किया था लेकिन अभी तक श्रीलंका भी इस फैसले पर आगे नहीं बढ़ पाया है | निश्चित तौर पर किसी भी स्वायत्त प्रदेश को यह समझौता उसकी संप्रभुता पर चोट करता प्रतीत होता है | जिसके कारण कोई भी राष्ट्रवादी सरकार इस समझौते पर आगे नहीं बढ़ पाती है  |

इस समझौते के बाद मालदीव में एक बार फिर से हंगामे के आसार नजर आ रहे हैं | माना जा रहा है कि विपक्षी खेमा इस समझौते को लेकर सड़कों पर उतर सकता है | ऐसा वर्ष 2013 में हो चुका है जब भारतीय कंपनी को लेकर राष्ट्रवाद के नाम पर जोरदार प्रदर्शन हुए थे | जिसके बाद से भारत द्वारा तोहफे में दिए गए दो हेलीकॉप्टरों को भी वापस लौटा दिया गया था | उस समय बात सिर्फ एक कंपनी विशेष को लेकर थी | लेकिन इस समझौते के अंतर्गत अमेरिकी सेना को कुछ विशेष रियायतें दी गई हैं और आने वाले वर्षों में इसी समझौते की पृष्ठभूमि के आधार पर अमेरिकी सैनिक मालदीव की धरती पर देखने को मिलेंगे | लेकिन अभी तक विरोध की आवाज नहीं उठने की वजह विशेषज्ञों को समझ में नहीं आ रही है | कुछ विशेषज्ञों का कहना है शायद वर्ष 2013 के विरोध प्रदर्शन इसलिए हुए थे क्योंकि मालदीव में चीनी कंपनियों पर भारतीय कंपनियों को तवज्जो दी जा रही थी और मौजूदा परिदृश्य में ऐसा कुछ भी नहीं है | कारण चाहे जो भी रहा हो लेकिन यह तो स्पष्ट ही है कि यामीन खेमा भारत विरोधी और चीन का समर्थक रहा है | हिंद महासागर क्षेत्र के देशों में अमेरिका का बढ़ता प्रभाव भारत के लिए राहत की बात है | अमेरिका लगातार क्वॉड ग्रुप के माध्यम से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी भूमिका को बढ़ाने और चीन को प्रत्युत्तर देने का प्रयास कर रहा है | आगामी मालाबार सैन्य अभ्यास में आस्ट्रेलिया को आमंत्रित करना चीन की गतिविधियों को सीमित करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है | पूर्व में चीन के भारी विरोध के कारण ही ऑस्ट्रेलिया को मालाबार सैन्य अभ्यास से जुड़ा नहीं जा सका था | लेकिन जिस तरह से दक्षिण चीन सागर और हिंद महासागर क्षेत्र में लगातार चीन विवाद को बढ़ा रहा है | अन्य क्षेत्रीय देशों की संप्रभुता का हनन कर रहा है, उससे अमेरिका और इस क्षेत्र के देशों का एक साथ आना आवश्यकता से अधिक विवशता है |

समग्रता से भी देखें तो मालदीव और अमेरिका के बीच संपन्न हुआ सैन्य समझौता भारत के हित में है क्योंकि इससे चीन का प्रभाव हिंद महासागर क्षेत्र में कम हो सकेगा | अमेरिका की उपस्थिति के कारण हिंद महासागर क्षेत्र और दक्षिण चीन सागर में बढ़ रहे विवादों में कमी भी देखने को मिल सकती है | आगे इस बात की भी संभावनाएं हैं कि क्वॉड का विस्तार भी हो सकता है जिसमें हिंद महासागर और दक्षिण चीन सागर से जुड़े हुए देशों को इसमें शामिल किया जा सकता है | वर्तमान परिदृश्य को देखते हुए यदि इस तरह की कोई व्यवस्था बन पाती है तो इस क्षेत्र की शांति और स्थिरता को बनाए रखने में निश्चित तौर पर मदद मिलेगी |

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