06 June, 2026 (Saturday)

नहीं थम रही है गांवों में महंगाई बढ़ने की रफ्तार

देश में शहरों के मुकाबले गांवों में बढ़ती महंगाई थमने का नाम नहीं ले रही है। सितंबर महीने में जहां सिर्फ सब्जियों और घी-तेल शहरों के मुकाबले गांवों में महंगा हो गया था वहीं अक्तूबर में इनके साथ साथ मसाले भी महंगे हो गए हैं। पिछले साल अक्तूबर से तुलना की जाए तो इस साल ग्रामीण इलाकों में खाने पीने की चीजें और पान तंबाकू जैसी चीजें 10 फीसदी से ज्यादा महंगी हुई है।

अक्तूबर के आए शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स यानि सीपीआई महंगाई 7.61 फीसदी रही है जिसमें शहरी इलाकों की महंगाई 7.4 तो ग्रामीण इलाकों की महंगाई 7.69 फीसदी पहुंच गई है। सितंबर में शहरी इलाकों में महंगाई 7.26 और ग्रामीण इलाकों में 7.36 फीसदी पर पहुंच गई थी। इस बढ़ी महंगाई में सबसे ज्यादा योगदान सब्जियों का रहा है। अक्तूबर में ग्रामीण इलाकों में सब्जियों की कीमत 24.05 फीसदी बढ़ी है वहीं शहरों में ये 19.84 फीसदी बढ़ी। सितंबर में ग्रामीण इलाकों में सब्जियों की महंगाई 22.71 फीसदी और शहरी इलाकों 17.41 फीसदी बढ़ी थी।

अक्तूबर में तेल और घी जैसी चीजों की महंगाई गांवों में 15.76 फीसदी और शहरों में 13.96 फीसदी बढ़ी है। मसाले गांवों में 11.27 फीसदी तो शहरों में 11.23 फीसदी बढ़े हैं। ग्रामीण इलाकों में पिछले साल अक्टूबर के मुकाबले खाने पीने की चीजों के दाम 10.11 और पान तंबाकू जैसी चीजें 10.34 फीसदी महंगी हुई है। हालांकि ये शहरों के मुकाबले कुछ कम महंगी हुई है। राज्यों की बात की जाए तो यूपी, उत्तराखंड, उड़ीसा, तेलंगाना और गुजरात में शहरों से महंगे गांव हैं वहीं बिहार, दिल्ली, हरियाणा, झारखंड के शहरों से सस्ते गांव हैं।

शहरों से महंगे गांव

उत्तर प्रदेश में ग्रामीण महंगाई 7.31 और शहरी महंगाई 6.68 फीसदी, उत्तराखंड में ग्रामीण महंगाई 8.28 और शहरी महंगाई 8.03 फीसदी है। उड़ीसा में ग्रामीण 11.13 और शहरी महंगाई 7.61 फीसदी, तेलंगाना में ग्रामीण 11.98 और शहरी महंगाई 9.05 फीसदी है। वहीं गुजरात में ग्रामीण 6.78 और शहरी महंगाई 6.03 फीसदी है।

शहरों से सस्ते गांव

बिहार में ग्रामीण 9.36 और शहरी महंगाई 11.74 फीसदी, दिल्ली में ग्रामीण 2.15 और शहरी महंगाई 3.92 फीसदी है। हरियाणा में ग्रामीण 6.05 और शहरी 6.44 फीसदी तो झारखंड में ग्रामीण 7.20 और शहरी महंगाई 9.48 फीसदी है।

जानकारों की राय में ग्रामीण इलाकों में परिवहन की शहरों के मुकाबले खराब व्यवस्था और खास तौर पर सब्जियों की रखरखाव से जुड़ी कमियां इस असंतुलन के लिए जिम्मेदार हैं।

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