ट्रंप की सोशल मीडिया पर मतदाताओं से अपील, अगर बदल सकते हैं तो बदल दें मेरे लिए अपना वोट



अमेरिकी चुनाव की अंतिम तिथि जैसे-जैसे नजदीक आती जा रही है वैसे-वैसे इसका रोमांच बढ़ता जा रहा है। जिन राज्यों में वोट डाले जा चुके हैं वहां कहा जा रहा है कि ट्रंप हार रहे हैं और बिडेन जीत रहे हैं। अब ऐसी बात पता चलने पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप थोड़े से चिंतित है। वो वोटरों से अपील कर रहे हैं कि यदि वो अपने इलाके में वोट डाल चुके हैं तो एक बार फिर से विचार कर लें, यदि वो अपना वोट बदल सकते हैं तो उसे बदल दें ये उनकी जिंदगी का महत्वपूर्ण चुनाव है। अमेरिका के कई राज्यों में वोट बदलने का कानून है। किसी राज्य में वोटर अपना वोट तीन बार बदल सकता है तो किसी राज्य में गणना होने से पहले तक यह सुविधा मौजूद है उसके बाद नहीं।
गूगल पर देखा ट्रेंड
ट्रंप ने एक ट्वीट में कहा कि उन्हें गूगल पर देख कर पता चला है कि कई लोग जो शुरूआती मतदान की सुविधा का फायदा उठा कर अपना मत डाल चुके हैं वो यह जानना चाह रहे हैं कि क्या वे अपना वोट बदल सकते हैं। ट्रंप ने कहा कि ऐसे लोगों को वो बताना चाहेंगे कि अधिकतर राज्यों में मतदाता बिल्कुल ऐसा कर सकते हैं और उन्हें यह करना ही चाहिए।
चुनाव अभियान की शुरुआत से यह अंदेशा व्यक्त किया जा रहा है कि अगर ट्रंप चुनाव हार गए तो संभव है कि वो और उनके समर्थक हार को आसानी से स्वीकार ना करें और सत्ता के हस्तांतरण में अवरोध पैदा करें। खुद ट्रंप से इस संभावना के बारे में पूछा गया है लेकिन उन्होंने कभी भी जोर देकर इस संभावना से इनकार नहीं किया है। अगर ऐसा हुआ तो वो स्थिति काफी पेचीदा हो सकती है।
50 फीसद से अधिक लोग डाल चुके वोट
अमेरिका में अभी तक 6.6 करोड़ से भी ज्यादा मतदाता शुरूआती मतदान में अपना वोट डाल चुके हैं, जोकि साल 2016 के कुल मतदान का लगभग 50 प्रतिशत है। इनमें से 4.4 करोड़ वोट डाक के जरिए डाले गए हैं और 2.2 करोड़ चुनावी कार्यालयों में जा कर। सर्वेक्षणों में यह भी दावा किया जा रहा है कि शुरूआती मतदान के रुझान डेमोक्रेटों के पक्ष में हैं और रिपब्लिकन पीछे हैं। इस वजह से कहा जा रहा है कि ट्रंप चुनाव हार रहे हैं और बिडेन को जीता हुआ कहा जा रहा है। ऐसे में ट्रंप के ट्वीट के बाद मतदान से जुड़ी अनिश्चितताएं बढ़ गई हैं।
कुछ राज्यों में वोट डालने का नियम
असलियत यह है कि वोट बदलने की सुविधा सिर्फ कुछ ही राज्यों में है और उन राज्यों में भी अलग अलग काउंटियों में अलग अलग नियम हैं। विस्कॉन्सिन शहर में मतदाता कुल तीन बार अपना वोट बदल सकते हैं, जबकि कनेक्टिकट में यह स्थानीय अधिकारियों की अनुमति पर निर्भर करता है। एक बात और ये भी है कि कुछ राज्यों में वोट एक तय तारीख तक ही बदला जा सकता है। जबकि कुछ दूसरे राज्यों में ऐसा मतदान के दिन तक किया जा सकता है। कई जगह वोट बदलने के कानूनों से संबंधित मामले अदालतों में चल रहे हैं, जहां रिपब्लिकन पार्टी धीरे-धीरे अपनी विचारधारा वाले जजों को भरती करती जा रही है।
अदालत का फैसला
सोमवार को जब ट्रंप द्वारा मनोनीत की हुई जज एमी कोनी बैरेट की सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति हुई, उसी दिन अदालत ने एक ऐसे ही मामले में फैसला दिया कि विस्कॉन्सिन में तीन नवंबर को मतदान के बाद प्राप्त होने वाले डाक मतों की गिनती नहीं की जाएगी। ऐसे में ऐसा लग रहा है कि अगर ट्रंप और बिडेन में से किसी को भी भारी बहुमत से विजय नहीं हुई, तो नतीजे पेचीदा रहेंगे और मतगणना कई दिनों तक भी चल सकती है।