10 March, 2026 (Tuesday)

पांच साल से अधूरा आदिवासी विश्राम भवन

जगदलपुर(ईएमएस)। आदिवासी विश्राम भवन का निर्माण कार्य पिछले पांच वर्षों से अधूरा पड़ा होने के कारण आदिवासी समाज को ठहरने और अन्य सुविधाओं के लिए समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। भवन न बनने से शहर में आने वाले आदिवासी समाज के लोग शासकीय और न्यायालयीन कार्यों के लिए ठहरने की सुविधा से वंचित हैं। सर्व आदिवासी समाज के संभागीय अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर ने बताया कि 13 नवंबर 2021 को तत्कालीन बस्तर कलेक्टर ने भवन निर्माण स्थल पर डिस्मेंटल कार्रवाई के आदेश जारी किए थे, जिससे निर्माण कार्य रोक दिया गया। इसके पहले अगस्त 2021 में तत्कालीन मंत्री कवासी लखमा ने भवन निर्माण की घोषणा की थी और इसके लिए 4 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। 9 अगस्त 2021 को भूमिपूजन कर निर्माण कार्य शुरू किया गया था। प्रकाश ठाकुर ने आरोप लगाया कि कुछ बस्तर के नेताओं ने बार-बार निर्माण कार्य को रोकवाया। इसके अलावा, बस्तर के सांसद और विधायक वन अधिकार मान्यता कानून और पेसा कानून के तहत आदिवासियों के हितों की रक्षा नहीं कर रहे हैं, जबकि बाहरी उद्योगपतियों और व्यापारियों को संरक्षण दिया जा रहा है। आदिवासियों को सामुदायिक वन संसाधन दावा पत्र भी नहीं दिए जा रहे हैं। सर्व आदिवासी समाज बस्तर संभाग युवा प्रभाग के अध्यक्ष संतू मौर्य ने बताया कि अधूरे भवन के कारण दूर-दराज़ के गांवों से आने वाले आदिवासी समाज के लोगों को ठहरने, भोजन और अन्य बुनियादी सुविधाओं में कठिनाई हो रही है। विशेष रूप से बस्तर दशहरा के दौरान देवी-देवताओं के साथ आने वाले सिरहा, पुजारी, मांझी, चालकी एवं अन्य लोगों के लिए यही भवन प्रमुख ठहरने का स्थल है, लेकिन अधूरे निर्माण के कारण उन्हें समुचित सुविधा नहीं मिल पा रही। आदिवासी समाज ने प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मांग की है कि आदिवासी विश्राम भवन का निर्माण कार्य तुरंत पूरा कराया जाए, अन्यथा आंदोलन की ओर कदम बढ़ाने की चेतावनी दी गई है।

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