सुप्रीम कोर्ट का फैसला: अब यूएस में केवल महिला और पुरुष ही होंगे
वाशिंगटन (ईएमएस)। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने उस नीति को लागू करने की अनुमति दे दी, जिसके तहत पासपोर्ट आवेदन में व्यक्ति अपने ‘लिंग पहचान’ के अनुसार लिंग नहीं चुन सकेगा। इस फैसले को ट्रंप प्रशासन की ओर से ट्रांसजेंडर अमेरिकियों के अधिकारों पर एक और कड़े प्रहार के रूप में देखा जा रहा है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल मई में ट्रंप प्रशासन को सेना में ट्रांसजेंडर लोगों की भर्ती पर प्रतिबंध लगाने की अनुमति भी दे दी थी। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इस नीति का बचाव करते हुए ट्रांसजेंडर सैनिकों पर आपत्तिजनक शब्द कह कर विवाद खड़ा कर दिया था। वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में 6-3 का कंजर्वेटिव बहुमत है और जनवरी में ट्रंप की वापसी के बाद से अदालत ज्यादातर मामलों में उनके प्रशासन के पक्ष में ही फैसले दे रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने अमेरिकी न्याय विभाग के उस अनुरोध को मंजूर किया, जिसमें उसने निचली अदालत के उस आदेश को हटाने की मांग की थी जिसने इस नीति पर रोक लगाई थी। अब पासपोर्ट पर केवल व्यक्ति का ‘जन्म के समय दर्ज लिंग’ ही मान्य होगा।यह नीति उस परंपरा को पलट देती है जो 1992 से लागू थी। तब अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने मेडिकल डॉक्यूमेंट के आधार पर व्यक्ति को अपनी लिंग पहचान के अनुसार पासपोर्ट बनवाने की छूट दी थी। अदालत के इस फैसले का तीन लिबरल जजों ने सार्वजनिक रूप से विरोध किया। राष्ट्रपति ट्रंप के इस आदेश के खिलाफ एक क्लास एक्शन मुकदमा अभी भी चल रहा है। विरोध करने वालों का कहना है कि यह फैसला ट्रांसजेंडर और नॉन-बाइनरी लोगों के अधिकारों पर गंभीर चोट है।
गौरतलब है कि पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन ने 2021 में इस नीति को बदलते हुए सभी अमेरिकी नागरिकों को पासपोर्ट आवेदन में ‘पुरुष’, ‘स्त्री’ या तीसरा विकल्प एक्स (नॉन-बाइनरी, इंटरसेक्स और जेंडर नॉन-कन्फॉर्मिंग लोगों के लिए) चुनने की स्वतंत्रता दी थी। इस फैसले से अब ये स्वतंत्रता नहीं मिलेगी। लेकिन जनवरी में दोबारा सत्ता में लौटने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने एक के बाद एक कार्यकारी आदेश जारी कर ट्रांसजेंडर लोगों के अधिकारों पर अंकुश लगाना शुरू किया। उन्होंने एक आदेश में कहा था कि अमेरिकी सरकार केवल दो लिंग यानी पुरुष और महिला को ही मान्यता देगी। ट्रंप ने सार्वजनिक मंचों पर ट्रांसजेंडर पहचान को ‘झूठ’ करार दिया था।
