सुप्रीम कोर्ट पहुंचे 18 झुग्गी वालों को ही मिली राहत, फरीदाबाद में रेलवे किनारे की झुग्गियां हटाने का मामला
फरीदाबाद में रेलवे ट्रैक के किनारे झुग्गियां ढहाए जाने के मामले में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट पहुंचे 18 याचिकाकर्ताओं को फौरी राहत मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका दाखिल करने वालों के मामले में अगली सुनवाई सात अक्टूबर तक यथास्थिति कायम रखने के आदेश दिये हैं। कोर्ट ने फरीदाबाद के मामले को सात अक्टूबर को गुजरात में रेलवे किनारे की झुग्गियां हटाने के मामले के साथ सुनवाई के लिए लगाने का आदेश दिया है।
रेलवे ने फरीदाबाद में रेलवे की जमीन पर संजय कालोनी में बनी झुग्गियां 29 सितंबर तक हटाने का नोटिस जारी किया था। झुग्गी वालों ने झुग्गी हटाने से पहले पुनर्वास की मांग करते हुए पहले पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की लेकिन जब 28 सितंबर को हाईकोर्ट कार्रवाई पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया तो 18 झुग्गी वालों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी।
29 सितंबर को याचिकाकर्ता झुग्गी वालों की ओर से वरिष्ठ वकील कोलिन गोंसाल्विस ने चीफ जस्टिस एनवी रमना की पीठ के समक्ष मामले की अर्जेन्सी बताते हुए तत्काल सुनवाई की मांग की। पीठ ने गुरुवार तक यथास्थित कायम रखने का आदेश देते हुए मामले को जस्टिस एएम खानविल्कर की अध्यक्षता वाली पीठ में सुनवाई के लिए 30 तारीख को लगाने का निर्देश दिया।
गुरुवार को जस्टिस खानविल्कर की पीठ के समक्ष सुनवाई में कोलिन गोंसाल्विस ने कहा कि फरीदाबाद की संजय कालोनी में करीब 500 लोग रहते हैं। उन्होंने कहा कि कोर्ट के पूर्व फैसलों के मुताबिक पुनर्वास के बगैर झुग्गी बस्ती को नहीं ढहाया जा सकता। इस पर कोर्ट ने कहा कि ऐसा ही एक मामला गुजरात में रेलवे किनारे की झुग्गियां हटाने का लंबित है। इस पर भी उसके साथ सात अक्टूबर को सुनवाई की जाएगी।
गोंसाल्विस ने तब तक झुग्गियां ढहाने पर रोक लगाने या यथास्थिति बनाए रखने का आदेश जारी रखने की मांग की। रेलवे की ओर से पेश एडीशनल सालिसिटर जनरल केएम नटराज ने कहा कि कोर्ट के यथास्थिति का आदेश देने से पहले करीब 450 झुग्गियां ढहाई जा चुकी हैं। सुनवाई के वक्त इस पहलू पर भी विचार करना होगा।
जब गोंसाल्विस ने सभी झुग्गियों को ढहाने पर रोक की बात जारी रखी तो कोर्ट ने कहा कि सभी के लिए आदेश नहीं देंगे। जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी है सिर्फ उन्हीं के बारे में आदेश दिया जाएगा। अगर ऐसा नहीं है तो आप दिखाइये कि यह याचिका सभी झुग्गी वालों के प्रतिनिधित्व के लिए दाखिल की गई है।
कोलिन यह नहीं दिखा पाए। उन्होंने कहा कि जल्दी में 24 घंटे के भीतर याचिका दाखिल की गई है। लेकिन वास्तव में 143 परिवार हैं जो प्रभावित हो रहे हैं। इन दलीलों पर पीठ ने कहा कि आप सीधे सुप्रीम कोर्ट नहीं आये। पहले हाईकोर्ट गए थे। क्या हाईकोर्ट में ऐसा कोई पत्र लगाया था कि याचिका सभी के प्रतिनिधित्व के लिए दाखिल की गई है। रिकार्ड देखने से नहीं पता चलता कि याचिका सभी के प्रतिनिधित्व के लिए दाखिल हुई है।
कोलिन ने कहा कि वे हाईकोर्ट में लंबित याचिका में संशोधन के लिए कदम उठाएंगे। पीठ ने सिर्फ सुप्रीम कोर्ट आये याचिकाकर्ताओं के मामले में यथास्थिति का आदेश देते हुए कहा कि यहां लंबित याचिका का हाईकोर्ट में लंबित याचिका की सुनवाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
