अब सिर्फ एक टेस्ट से पता चल सकेगा महिलाओं में होने वाले 4 तरह के कैंसर का पता
हाल-फिलहाल नेचर जर्नल में पब्लिश एक रिपोर्ट में ब्रिटेन के साइंटिस्ट ने अपनी एक खास खोज के प्रारंभिक रिजल्ट बताए हैं। जो खासतौर पर महिलाओं के लिए एक ऐसा टेस्ट डेवलप कर रहे हैं जिसकी मदद से एक या दो नहीं बल्कि 4 तरह के कैंसर की जांच एक साथ हो सकेगी।
कैसे काम करेगा यह टेस्ट?
इस टेस्ट का नाम है वुमन कैंसर रिस्क आइडेंटिफिकेशन टेस्ट (डब्ल्यूआईडी टेस्ट), ये पैप स्मियर टेस्ट से मिलने वाले सेल्स (कोशिकाओं) के डीएनए की जांच करेगा। गौरतलब है कि पैप स्मियर टेस्ट में महिला की योनि में एक यंत्र डालकर कुछ सेल्स को इकट्ठा किया जाता है फिर इनसे कैंसर सेल्स की पहचान की जाती है। ये सर्वाइकल कैंसर की जांच करने का एक तरीका है। वैज्ञानिकों का मानना है कि डब्ल्यूआईडी टेस्ट इन सैंपल्स से ओवेरियन, एंडोमेट्रियल और ब्रेस्ट कैंसर की भी जांच कर सकेगा।
क्या कहती है रिसर्च?
वैज्ञानिकों ने यूरोप के 15 सेंटर्स में तकरीबन 2,000 महिलाओं पर रिसर्च की। रिसर्च में इन सभी महिलाओं के सर्वाइकल सेल्स की जांच की गई। टेस्ट ने महिलाओं के डीएनए का विश्लेषण किया। जिसकी मदद से उनके जेनेटिक कैंसर हिस्ट्री पता चली। इसका मतलब जिन लोगों को भविष्य में कैंसर होने की संंभावना है। उनके लिए ये टेस्ट बेहद कारगर साबित होगा।
क्या कहते हैं रिसर्चर्स?
रिसर्चर्स के अनुसार, मौजूदा कैंसर टेस्ट- जैसे ब्लड टेस्ट और अल्ट्रासाउंड- ओवेरियन और एंडोमेट्रियल कैंसर को जल्दी नहीं पहचान पाते। जब तक इनका पता चलता है, तब तक देर हो चुकी होती है। इससे मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता। ऐसे में डब्ल्यूआईडी टेस्ट महिलाओं के लिए कैंसर से लड़ने में एक कारगर हथियार साबित हो सकता है।
महिलाओं में 4 तरह के खतरनाक कैंसर
1. ओवेरियन कैंसर
यह एक ऐसा कैंसर है, जिससे दुनिया में सबसे ज्यादा मौतें होती है। ओवेरियन कैंसर के 75 परसेंट मामलों का पता आखिरी स्टेज में चलता है।
2. ब्रेस्ट कैंसर
भारत में महिलाओं में होने वाले कैंसर के कुल मामलों में 27 परसेंट केस इसी के होते हैं। कम उम्र की लड़कियों में भी इसके लक्षण पाए जाने लगे हैं।
3. सर्वाइकल कैंसर
दुनिया भर में हर मिनट एक महिला को सर्वाइकल कैंसर होता है। इसके सबसे ज्यादा केस विकासशील देशों में पाए जाते हैं जैसे-भारत व चीन।
4. एंडोमेट्रियल कैंसर
55 साल की उम्र से ज्यादा की महिलाओं को ये कैंसर होता है लेकिन हार्मोन अंसतुलन की समस्या कम उम्र की महिलाओं में भी बढ़ गई है। जिस वजह से भविष्य में कम उम्र की महिलाओं में भी एंडोमेट्रियल कैंसर विकसित होने की पूरी-पूरी संभावना है।
