10 March, 2026 (Tuesday)

सांसद थरुर ने कहा- बांग्लादेश में स्थिति चिंताजन, लेकिन भारत रख रहा है नजर

नई दिल्ली(ईएमएस)। बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ जारी हिंसा और वहां के अस्थिर हालातों ने भारत में भी चिंता और आक्रोश पैदा कर दिया है। पड़ोसी देश में बिगड़ती स्थिति के विरोध में भारत के विभिन्न हिस्सों में हो रहे प्रदर्शनों पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। थरूर ने इन प्रदर्शनों के हिंसक होने की आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि एक जीवंत लोकतंत्र में हर नागरिक को अपनी बात रखने और विरोध जताने का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत में हो रहे ये प्रदर्शन फिलहाल पूरी तरह नियंत्रण में हैं और यहां की पुलिस किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति को रोकने में सक्षम है।
शशि थरूर ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार और उसके प्रमुख मोहम्मद यूनुस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि केवल घटनाओं पर खेद जताना या निंदा करना एक सरकार के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सड़कों पर हो रही हिंसा को रोकना और कानून-व्यवस्था बहाल करना वहां के प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। थरूर के अनुसार, जब तक आम नागरिक और अल्पसंख्यक समुदाय सुरक्षित महसूस नहीं करेंगे, तब तक लोकतंत्र की बहाली संभव नहीं है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि यदि वहां की पुलिस स्थिति संभालने में विफल हो रही है, तो सेना की मदद ली जानी चाहिए, लेकिन अराजकता का यह दौर अब समाप्त होना चाहिए।
बांग्लादेश में आगामी चुनावों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए सांसद ने कहा कि जिस देश में चारों तरफ डर का माहौल हो और मतदाता खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा हो, वहां निष्पक्ष चुनाव कराना लगभग असंभव है। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले शांति और सुरक्षा का वातावरण तैयार करना अनिवार्य है। गौरतलब है कि बांग्लादेश में छात्र नेता उस्मान हादी की हत्या के बाद से स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई है। जहां प्रशासन इस हत्या के पीछे राजनीतिक रंजिश बता रहा है, वहीं हादी के परिवार ने अंतरिम सरकार पर ही गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का मानना है कि चुनावों को टालने और सत्ता पर पकड़ बनाए रखने के लिए इस तरह की घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है। इस राजनीतिक उथल-पुथल के बीच, बांग्लादेश की राजनीति के एक और बड़े खिलाड़ी और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान की वापसी की चर्चाओं ने सरगर्मी बढ़ा दी है। एक तरफ कट्टरपंथियों का बढ़ता प्रभाव और दूसरी तरफ प्रमुख राजनीतिक हस्तियों की सक्रियता ने बांग्लादेश के भविष्य को अनिश्चितता के भंवर में डाल दिया है। भारत इस पूरी स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है, क्योंकि वहां की अस्थिरता का सीधा असर सीमावर्ती क्षेत्रों और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ता है।

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