मनी लॉन्ड्रिंग…100 मिलियन डॉलर की रिश्वत, जंग के बीच बड़ी मुसीबत में फंसे जेलेंस्की
यूक्रेन और रूस की जंग पिछले कई साल से चल रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस जंग में यूक्रेन को ज्यादा जानमाल का नुकसान बताया जाता है. इसको रोकने के लिए राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की कई देशों की मदद मांगते नजर आते रहे हैं. अब जेलेंस्की पर दूसरी मुसीबत आ पड़ी है.
Volodymyr Zelenskyy: यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की अब एक तरफ रूस से परेशान हैं, तो अब उनको एक नई परेशानी ने घेर लिया है. दरअसल, जेलेंस्की अभी करप्शन के इल्जाम झेल रहे हैं. 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर की रिश्वत लेने और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे आरोप लगे हैं. हालांकि, ये इल्जाम डायरेक्ट जेलेंस्की पर नहीं, बल्कि उनके सहयोगी और उनकी पूर्व कंपनी क्वार्टल 95 के सह-मालिक पर लगे हैं. इसके अलावा, फर्जी कागजों के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग के भी आरोप लगे हैं.
जेलेंस्की को तैमूर मिंडिच ने दिया धोखा
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये पूरा मामला जेलेंस्की की पुरानी कंपनी और तैमूर मिंडिच नाम के शख्स के साथ जुड़ा है. मिंडिच पर रिश्वतखोरी और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है. वहीं, यूक्रेन के राष्ट्रीय भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो का कहना है कि मिंडिच ने एक सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी के ठेकेदारों से लगभग 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर की रिश्वत और कमीशन लिया. इसके साथ ही फर्जी कंपनियों के नाम पर मनी लॉन्ड्रिंग भी की है. हालांकि, मिंडिच पहले ही यूक्रेन छोड़ चुके हैं.
मामले को लेकर जनता ने बनाया दबाव
इस मामले को लेकर जनता की तरफ से जेलेंस्की पर दबाव बनाया गया, जिसके बाद राष्ट्रपति ने अपने सहयोगी पर पाबंदी लगाने का वादा किया. इस मामले पर राजनीतिक विश्लेषक फेसेंको का बयान भी सामने आया. उन्होंने कहा कि ‘जेलेंस्की जिन लोगों पर भरोसा करते है, लेकिन कई बार उन्हें इसके परिणाम भुगतने पड़े हैं. मिंडिच के मामले में उन्होंने जरूरत से ज्यादा भरोसा किया. इस तरह भरोसा करने का बुरा अंजाम हो सकता है.’बता दें कि जेलेंस्की जब सत्ता में आए थे, तब उनका मुद्दा भाई-भतीजावाद को खत्म करना था. अब जेलेंस्की पर ये इल्जाम लग रहे हैं कि वह इस मुद्दे को भूल गए हैं और खुद इस तरह की चीजों में फंस गए हैं.
