कानूनी सेवा क्षेत्र खोलने से भारतीय वकीलों को होगा लाभ, यूरोप, आस्ट्रेलिया और अमेरिकी बाजारों में संभावना : गोयल
घरेलू कानूनी सेवा क्षेत्र को विदेशी बाजार के लिए खोलने से भारतीय वकीलों को बड़ा लाभ मिल सकता है। वाणिज्य व उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को कहा कि इससे भारतीय वकीलों के लिए यूरोप, आस्ट्रेलिया और अमेरिकी बाजारों में संभावनाओं के नए द्वार खुलेंगे। सर्विसेज एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (एसईपीसी) के ग्लोबल सर्विसेज कान्क्लेव, 2021 में गोयल का कहना था कि इस मसले पर भारतीय कानूनविदों की राय लेनी जरूरी है। यह लगभग निश्चित है कि इस क्षेत्र को खोलने के बाद भी भारतीय दरों पर काम करने के लिए यूरोप और अमेरिका से वकील यहां नहीं आने वाले हैं। लेकिन भारतीय वकीलों के लिए यूरोप, अमेरिका और आस्ट्रेलिया जैसे बड़े बाजारों में अपार संभावनाओं के द्वार खुल जाएंगे।
गोयल का कहना था कि भारत वर्ष 2030 तक सर्विस सेक्टर का निर्यात एक लाख करोड़ डालर यानी वर्तमान भाव पर लगभग 75 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच जाने की ओर है। भारत दुनिया का सातवां सबसे बड़ा सेवा निर्यातक है। इसमें 2.6 करोड़ लोगों को रोजगार मिला हुआ है और देश के निर्यात में इसकी हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी कानूनी सेवा के चुनिंदा क्षेत्रों को विदेशी बाजारों के लिए खोलने की औपचारिक बातचीत शुरू हुई थी। लेकिन साझेदारों के एक वर्ग ने इस पर कुछ आपत्तियां जाहिर की थीं, जिसके चलते यह वार्ता अंतिम नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। गोयल ने पर्यटन व आतिथ्य सत्कार जैसे सेवा क्षेत्रों के कोरोना संकट से जल्द उबर जाने की उम्मीद जताई।
चालू खरीफ सत्र में अब तक 209 लाख टन धान की खरीद
केंद्र सरकार ने मौजूदा खरीफ मार्केटिंग सत्र में अब तक 41,066.80 करोड़ रुपये से अधिक के209.52 लाख टन धान की खरीद की है। खरीफ मार्केटिंग सत्र हर वर्ष अक्टूबर से अगले वर्ष सितंबर तक का होता है। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआइ) खाद्यान्न की खरीद और वितरण के लिए सरकार की नोडल एजेंसी है। खाद्य मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि चालू खरीफ मार्केटिंग सत्र में आठ नवंबर तक 209.52 लाख टन धान की खरीद की जा चुकी है। यह खरीद चंडीगढ़, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, तेलंगाना, राजस्थान, केरल, तमिलनाडु और बिहार से की गई है।
सरकार ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर 41,066.80 करोड़ रुपये की खरीद की गई है और इससे लगभग 11.57 लाख किसान लाभान्वित हुए हैं। मंत्रालय के अनुसार पिछले वर्षो की तरह इस साल भी धान की खरीद सुचारू रूप से चल रही है।
