10 March, 2026 (Tuesday)

भारत और यूरोपीय संघ के बीच समझौते से सस्ती होंगी लग्जरी कारें और विदेशी चॉकलेट

नई दिल्ली,(ईएमएस)। भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच आर्थिक संबंधों के एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। दोनों पक्षों ने प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लिए आधिकारिक स्तर की बातचीत को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस महत्वाकांक्षी समझौते का मुख्य उद्देश्य दोतरफा व्यापार को गति देना और दोनों क्षेत्रों के बीच निवेश के नए रास्ते खोलना है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने सोमवार को इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि आधिकारिक स्तर की चर्चा समाप्त हो चुकी है। इससे भारत और यूरोपीय संघ के बीच समझौते से सस्ती होंगी लग्जरी कारें और विदेशी चॉकलेट के भी दाम गिर जाएंगे।
यह समझौता पिछले 18 वर्षों से चल रही लंबी और जटिल वार्ताओं का परिणाम है। भारत और यूरोपीय संघ के बीच इस व्यापारिक सौदे को लेकर चर्चा का सिलसिला वर्ष 2007 में शुरू हुआ था, जो कई उतार-चढ़ावों के बाद अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुँचा है। वर्तमान में समझौते के मसौदे की कानूनी जांच की प्रक्रिया चल रही है। सरकार की योजना इन कानूनी औपचारिकताओं को जल्द से जल्द पूरा कर इसी साल समझौते पर हस्ताक्षर करने की है, ताकि इसे अगले साल की शुरुआत तक प्रभावी रूप से लागू किया जा सके। हालांकि, इसे जमीन पर उतारने में थोड़ा समय लग सकता है क्योंकि भारत में जहां इसे केवल केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी चाहिए, वहीं यूरोपीय संघ में इसे यूरोपीय संसद से पारित कराना अनिवार्य होगा।
इस समझौते की औपचारिक घोषणा के लिए मंगलवार का दिन बेहद खास है, क्योंकि इसी दिन भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा के साथ शिखर वार्ता करेंगे, जिसमें इस व्यापारिक मील के पत्थर का आधिकारिक ऐलान होगा। यह समझौता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यूरोपीय संघ भारत का एक बड़ा व्यापारिक भागीदार है। वित्त वर्ष 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार, दोनों के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार 136.53 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया है, जिसमें भारत का निर्यात आयात की तुलना में अधिक रहा है।
भारतीय उपभोक्ताओं के लिए इस समझौते का सबसे बड़ा आकर्षण लग्जरी सामानों की कीमतों में होने वाली संभावित गिरावट है। समझौते के तहत एक टैरिफ रेट कोटा निर्धारित किया जाएगा, जिसके जरिए यूरोप से आने वाली लग्जरी कारों पर आयात शुल्क कम होगा। शुरुआती जानकारी के अनुसार, करीब 16.3 लाख रुपये (15 हजार यूरो) से अधिक मूल्य वाली कारों को सीमित संख्या में कम शुल्क पर आयात करने की अनुमति मिलेगी। इससे मर्सिडीज-बेंज, बीएमडब्ल्यू, ऑडी और वोक्सवैगन जैसी दिग्गज यूरोपीय कंपनियों की कारें भारतीय बाजार में सस्ती हो सकती हैं।
ऑटोमोबाइल के अलावा, इस समझौते का असर अन्य क्षेत्रों पर भी दिखेगा। यूरोप से आने वाली स्कॉच व्हिस्की, वाइन, वोदका और जिन जैसे उत्पादों पर आयात शुल्क कम होने से इनकी कीमतों में बड़ी गिरावट आने की उम्मीद है। बेल्जियम से आने वाले कच्चे हीरे (रफ डायमंड) भी सस्ते होंगे, जिससे भारत के हीरा उद्योग को मजबूती मिलेगी। साथ ही स्विट्जरलैंड और नीदरलैंड जैसे देशों से आने वाली प्रीमियम चॉकलेट के शौकीनों के लिए भी यह समझौता खुशखबरी लेकर आएगा। इस प्रकार, यह एफटीए न केवल व्यापारिक आंकड़ों को बढ़ाएगा, बल्कि भारतीय बाजार में यूरोपीय उत्पादों की पहुंच को भी आसान बनाएगा।

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