10 March, 2026 (Tuesday)

ब्राह्मण समाज को एकजुट करने में जुटे थे अग्निहोत्री, अब इंटेलिजेंस पर उठे सवाल

बरेली(ईएमएस)। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में सिटी मजिस्ट्रेट के पद पर तैनात रहे अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा इन दिनों देशव्यापी चर्चा का केंद्र बना हुआ है। प्रशासनिक पद पर रहते हुए समाज सेवा और एक विशिष्ट वर्ग को संगठित करने की उनकी गतिविधियों ने शासन से लेकर आम जनता तक सबको हैरान कर दिया है। बताया जा रहा है कि अलंकार अग्निहोत्री काफी समय से ब्राह्मण समाज को एकजुट करने के मिशन पर काम कर रहे थे, जिसकी भनक स्थानीय प्रशासन और खुफिया विभाग को अंत तक नहीं लग सकी।
सूत्रों के अनुसार, बरेली में तैनाती के दौरान ही उन्होंने ब्राह्मण समाज के उत्थान के लिए सक्रियता बढ़ा दी थी। चौंकाने वाली बात यह है कि सिटी मजिस्ट्रेट जैसे संवेदनशील पद पर रहते हुए वे अपने कार्यालय में ही समाज से जुड़े नेताओं और युवाओं के साथ नियमित बैठकें करते थे। इन चर्चाओं में ब्राह्मण समाज की मजबूती और संगठन विस्तार को लेकर रणनीति बनाई जाती थी। प्रशासनिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि कई अन्य ब्राह्मण अधिकारी भी उनके निरंतर संपर्क में थे। समाज को डिजिटल माध्यम से जोड़ने के लिए उन्होंने कई व्हाट्सएप ग्रुप भी बनाए थे। हाल ही में मालवीय जयंती पर जीआईसी ऑडिटोरियम में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के बाद समाज में उनकी लोकप्रियता चरम पर पहुंच गई और उन्हें एक नई पहचान मिलने लगी।
इस्तीफे की पटकथा अचानक नहीं लिखी गई। जानकारी के मुताबिक, अग्निहोत्री ने करीब पांच महीने पहले ही अपने करीबियों के बीच पद छोड़ने की इच्छा जताई थी। दिसंबर में भी इस पर विमर्श हुआ, लेकिन अंततः उन्होंने 26 जनवरी का दिन अपने त्यागपत्र के लिए चुना। इस पूरे मामले ने उत्तर प्रदेश के खुफिया तंत्र यानी स्थानीय खुफिया इकाई (एलआईयू) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक मजिस्ट्रेट स्तर का अधिकारी अपने कार्यालय का उपयोग सामाजिक बैठकों के लिए करता रहा, लेकिन एलआईयू को इसकी जानकारी नहीं हुई, इसे बड़ी विफलता माना जा रहा है। अब शासन स्तर पर इस इंटेलिजेंस फेल्योर की समीक्षा की जा रही है और माना जा रहा है कि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर बड़ी गाज गिर सकती है।अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब देश में आरक्षण और यूजीसी के नियमों को लेकर नई बहस छिड़ी हुई है। डैमेज कंट्रोल न हो पाने और इस पूरी प्रक्रिया के दौरान खुफिया इनपुट की कमी ने सरकार के लिए भी असहज स्थिति पैदा कर दी है।

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