07 March, 2026 (Saturday)

Holi 2026 : इस Holi पर बस्तर की महिलाओं की खास पहल, प्राकृतिक हर्बल से दिया आत्मनिर्भरता का संदेश

होली एक प्रमुख हिंदू धार्मिक पर्व है जो बड़े ही हर्षोल्लास, आनंद, प्रेम और एकता की भावना को दर्शाता है। यह फागुन मास के शुक्ल पक्ष में मनाया जाता है और इसे विभिन्न नामों से जाना जाता है, जैसे- रंगपंचमी, धुलेंदी और धुलंडी। होली भारतीय संस्कृति और इतिहास में गहरे रूप से स्थापित है।
त्योहारों के समय दुकानों, बाजारों में केमिकल युक्त रंग, गुलाल का भंडार लगा रहता है। केमिकल युक्त गुलाल त्वचा, आंख और बालों को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे बचाव के लिए मध्य प्रदेश के बस्तर की महिलाओं ने अनोखी पहल की है। महिलाएं स्वयं सहायता समूह के माध्यम से फूलों, सब्जियों से प्राकृतिक हर्बल तैयार कर रही हैं। इससे सेहत के साथ-साथ पर्यावरण को भी कोई नुकसान नहीं होता। यह पहल राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत की गई है। इसके माध्यम से महिलाएं आत्मनिर्भरता का भी संदेश दे रहीं हैं।
ऐसे तैयार होता है प्राकृतिक हर्बल
यह हर्बल सब्जियों-फूलों से तैयार किया जाता है। इसमें पलाश के फूल से केसरिया, पालक सब्जी से हरा, लाल सब्जी और चुकंदर से लाल रंग का गुलाल तैयार किया जाता है। सुगंध के लिए इसमें गुलाब, गेंदा, पलाश की पंखुड़ियों, गुलाब-जल और इत्र का प्रयोग किया जाता है। यह गुलाल पूरी तरह से पाकृतिक होता है। इसे तैयार करने में किसी भी प्रकार के रसायन का उपयोग नहीं किया जाता, जिससे यह पूरी तरह सुरक्षित रहता है।
महिला सशक्तिकरण के साथ स्व रोजगार को बढ़ावा
यह पूरा काम राष्ट्रीय ग्रमीण आजीविका मिशन के तहत किया गया है। जिले में प्रशिक्षण कैंप लगाकर स्वयं-सहायता समूह की महिलाओं को प्रशिक्षित किया जाता है। इस दौरान उन्हें वैज्ञानिक तरीके से प्राकृतिक गुलाल बनाना सिखाया जाता है। यह पूरी तरह इको-फ्रेंडली होता है। इससे किसी प्रकार का नुकसान नहीं है। व्यक्ति या पर्यावरण को किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं।
मौजूदा वर्ष में 500-1000 किलो हर्बल तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके विक्रय के लिए पास के शहर के अलावा शासकीय कार्यालयों और स्थानीय बाजारों पर स्टॉल लगाया जाएगा। स्वयं-सहायता महिलाओं की यह पहल न केवल स्थानीय स्वरोजगार को बढ़ावा देगी बल्कि महिला सशक्तिकरण में भी सहायक होगी। महिलाओं के आय में बढ़ोत्तरी के साथ-साथ घर पर ही रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

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