हजरत अली ने अमन शांति और मानवता का दिया पैगामः मोहम्मद हसन हजरत अली के जन्म दिवस पर महफिल.मिलाद जुलूस निकालकर शिया मुसलमानों ने खुशी का किया इजहार
(सिद्धार्थनगर )। इस्लाम धर्म प्रवर्तक हजरत मोहम्मद मुस्तफा के दामाद और शिया मुसलमानों के पहले इमाम हजरत अली अलैहिस्सलाम की यौमे पैदाइश (जन्मदिन) के मौके पर शुक्रवार को शिया बाहुल्य कस्बा हल्लौर सहित कई मुस्लिम बहुल गांव में महफिल मिलाद का आयोजन किया गया। हजरत अली के अनुयायियों ने जुलूस निकालकर अपनी खुशी का इजहार किया।
गुरुवार की रात हल्लौर स्थित जामा मस्जिद में मौलाना महबूब हल्लौरी के संचालन और मौलाना मोहम्मद हसन की अध्यक्षता में जश्ने अली का आयोजन किया गया। जश्न ए अली की शुरुआत अब्बास अली द्वारा किए गए तिलावते कलाम पाक से हुआस तत्पश्चात नाते पाक शादाब हल्लौरी ने पेश किया। इसके बाद मुकामी शायरों के कलाम व कसीदे का जो दौर शुरू हुआ उसका सिलसिला देर रात तक चलता रहा। मुकामी शायरों ने अपने अपने अंदाज में मौला अली की शान में कसीदा पेश किया। कार्यक्रम के अंत में महफिल आयोजक तशबीब हसन ने आये हुए सभी लोगों का शुक्रिया अदा किया। रात मे ही ही मोहम्मद हैदर के आवास पर तथा शुक्रवार सुबह कस्बे की विभिन्न मस्जिदों व जमाल आपरेटर के आवास पर महफिल आयोजित हुई। जिसमें बड़ी तादात में मुकामी शायरों ने शिरकत किया। इसके अलावा सुबह से शाम तक कस्बे की मस्जिदों व घरों में महफिल का सिलसिला चलता रहा। इस मौके पर जगह-जगह लंगर का भी इंतजाम किया गया था। हर तरफ जश्न का माहौल रहा। हल्लौर कस्बा सहित भटगवा, जमोतिया. तिलगढ़िया, हटवा सहित विभिन्न स्थानों की मस्जिदों .रौजे और घरों, प्रतिष्ठानों पर रोशनी की विशेष व्यवस्था की गई। शायरों ने हजरत अली की शान में कलाम व कसीदे पढ़े। शुक्रवार दोपहर जुलूसे हैदरी दरगाह द्वारा हल्लौर से अली ब्वॉयज कमेटी के अध्यक्ष शबाब रिजवी और काजिम रजा. वजीर हैदर .जानशीन हैदर के नेतृत्व में सैकड़ो मोटरसाइकिल. घोड़ों और लोगों के भारी हुजूम के साथ निकला जो बैदौला होते हुए मंदिर चैराहा डुमरियागंज पहुंचा। जहां राम प्रकाश गौतम व जमाल हैदर ने अपने संबोधन के जरिए इमाम हजरत अली के जीवन और कृतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। मौलाना मोहम्मद हसन ने कहा कि हजरत अली अलैहिस्सलाम ने हमेशा दुनिया को हक सच्चाई और अमन शांति तथा मानवता का पैगाम दिया। मौलाना ने कहा कि हजरत अली के बताए हुए सत्य के मार्गों पर चलने से मानव ही नहीं समस्त संसार का भला हो सकता है।
