17 June, 2026 (Wednesday)

Explainer: क्या आपका बच्चा भी सोशल मीडिया का दीवाना है? स्टडी में पता चला बहुत बड़ा खतरा

एक स्टडी के मुताबिक, दिन में 2 घंटे से ज्यादा सोशल मीडिया इस्तेमाल करने वाले बच्चों में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। खासकर 12-13 साल की उम्र सबसे संवेदनशील पाई गई। रिसर्च में डिप्रेशन, चिंता और वेलबीइंग में गिरावट जैसे प्रभाव सामने आए हैं।
Social Media Impact On Children: आज के समय में बच्चे और किशोर सोशल मीडिया पर काफी समय बिताते हैं। ऐसे में यह सवाल बहुत जरूरी हो जाता है कि क्या ज्यादा सोशल मीडिया इस्तेमाल उनके मानसिक स्वास्थ्य पर असर डालता है? ऑस्ट्रेलिया में हुई एक नई स्टडी और माता-पिता पर किए गए एक सर्वे ने इस विषय पर कुछ महत्वपूर्ण और साफ बातें सामने रखी हैं। इन नतीजों से पता चलता है कि सोशल मीडिया का असर उम्र, इस्तेमाल के समय और जीवन की परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

स्टडी के लिए 1195 छात्र किए गए ट्रैक
मेलबर्न में हुई एक नई स्टडी, जो ‘मेडिकल जर्नल ऑफ ऑस्ट्रेलिया’ में प्रकाशित हुई है, में 1195 छात्रों को 12 से 18 साल की उम्र तक हर साल ट्रैक किया गया। इस रिसर्च का मकसद यह समझना था कि सोशल मीडिया इस्तेमाल और मानसिक स्वास्थ्य के बीच क्या संबंध है, क्या इसका असर उम्र के साथ बदलता है, और क्या लड़के और लड़कियों में कोई फर्क होता है। इस स्टडी में कई व्यक्तिगत और पारिवारिक कारणों को भी ध्यान में रखा गया ताकि नतीजे ज्यादा भरोसेमंद हों, हालांकि यह सीधे तौर पर कारण साबित नहीं कर सकती।

स्टडी में सामने आए चौंकाने वाले नतीजे
स्टडी में पाया गया कि जो किशोर दिन में 2 घंटे से ज्यादा सोशल मीडिया इस्तेमाल करते हैं, उनमें अगले साल मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम ज्यादा होता है। इसकी तुलना में जो बच्चे 1 घंटे से कम इस्तेमाल करते हैं, उनमें यह जोखिम कम पाया गया। मानसिक समस्याओं में डिप्रेशन के लक्षण बढ़ना, वेलबीइंग में कमी और कभी-कभी खुद को नुकसान पहुंचाने जैसे विचार शामिल थे। इसका मतलब यह है कि ज्यादा समय तक सोशल मीडिया का इस्तेमाल मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकता है।
उम्र के हिसाब से दिखा अलग-अलग असर
इस स्टडी का एक बहुत महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह था कि सोशल मीडिया का असर हर उम्र में समान नहीं होता। सबसे ज्यादा असर 12 से 13 साल के बच्चों में देखा गया, चाहे वे लड़के हों या लड़कियां। इस उम्र में मानसिक समस्याओं, चिंता, डिप्रेशन और खराब वेलबीइंग का जोखिम लगभग दोगुना पाया गया। इसके मुकाबले 14 से 16 साल और 17 से 18 साल के किशोरों में यह असर कम देखा गया, जिससे यह साफ होता है कि शुरुआती किशोरावस्था सबसे ज्यादा संवेदनशील होती है।

आखिर क्यों जरूरी है इस स्टडी का निष्कर्ष
हालांकि यह असर बहुत बड़ा नहीं माना गया, लेकिन फिर भी यह महत्वपूर्ण है। उदाहरण के तौर पर, 12 से 13 साल की लड़कियों में अगर वे दिन में 2 घंटे से ज्यादा सोशल मीडिया इस्तेमाल करती हैं, तो हर 100 में लगभग 11 अतिरिक्त मामले डिप्रेशन के देखे गए। इसका मतलब है कि व्यक्तिगत स्तर पर असर छोटा लग सकता है, लेकिन जब बहुत बड़ी संख्या में बच्चे सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं, तो यह समाज के स्तर पर बड़ा मुद्दा बन जाता है।

क्या सोशल मीडिया पर बैन से होगा असर?
स्टडी यह भी बताती है कि सिर्फ एक ‘सुरक्षित उम्र’ तय करना आसान नहीं है और न ही सिर्फ उम्र आधारित रोक पूरी तरह समस्या का समाधान कर सकती है। हालांकि ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाया है, लेकिन रिसर्च के अनुसार इसका सबसे ज्यादा फायदा छोटे किशोरों को मिल सकता है। फिर भी यह साफ है कि केवल उम्र सीमा ही सभी जोखिमों को खत्म नहीं कर सकती।
बच्चों को इसके खतरे से कैसे बचाया जाए?
इस रिसर्च के अनुसार, सोशल मीडिया कंपनियों को भी जिम्मेदारी लेनी होगी। उनके ऐसे एल्गोरिदम और फीचर्स पर ध्यान देना जरूरी है जो बच्चों को बार-बार ऐप इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करते हैं। इसके साथ ही डिजिटल सुरक्षा और समझ को स्कूलों में बढ़ाना चाहिए और माता-पिता को भी बच्चों की ऑनलाइन आदतों को बेहतर बनाने में मदद करनी चाहिए। इसके लिए ‘डिजिटल ड्यूटी ऑफ केयर’ जैसे कानूनों की भी जरूरत बताई गई है।

बच्चों के माता-पिता का क्या मानना है?
ऑस्ट्रेलिया में 2,000 से ज्यादा माता-पिताओं पर किए गए एक सर्वे में पाया गया कि 59 प्रतिशत माता-पिता मानते हैं कि यह कानून उन्हें बच्चों के लिए सोशल मीडिया के नियम तय करने में मदद करता है। करीब 39 प्रतिशत माता-पिता ने कहा कि इस कानून ने उनकी सोच बदल दी है कि बच्चे किस उम्र में सोशल मीडिया शुरू करें। अब अधिकतर माता-पिता 16 साल की उम्र को सोशल मीडिया शुरू करने के लिए उपयुक्त मानने लगे हैं।

कई देशों में सोशल मीडिया पर बहस जारी
यह पूरी चर्चा सिर्फ ऑस्ट्रेलिया तक सीमित नहीं है, बल्कि अब कई देशों में इस बात पर बहस हो रही है कि बच्चों के लिए सोशल मीडिया कितना सुरक्षित है और किस उम्र में इसका इस्तेमाल शुरू होना चाहिए। अब बातचीत सिर्फ इस पर नहीं है कि सोशल मीडिया असर डालता है या नहीं, बल्कि इस पर है कि किस उम्र में बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं और समाज को इस पर क्या कदम उठाने चाहिए।

आखिर इस पूरी स्टडी का निचोड़ क्या है?
इस पूरी स्टडी और सर्वे से यह साफ होता है कि दिन में 2 घंटे से ज्यादा सोशल मीडिया इस्तेमाल बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए जोखिम बढ़ा सकता है। सबसे ज्यादा संवेदनशील उम्र 12 से 13 साल की पाई गई है। हालांकि असर बहुत बड़ा नहीं है, लेकिन बड़ी संख्या में बच्चों के कारण यह एक महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दा बन जाता है। इसलिए सिर्फ उम्र सीमा ही नहीं, बल्कि शिक्षा, माता-पिता की भूमिका और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी भी जरूरी है।

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