34 बच्चों के यौन शोषण मामले में आरोपी दंपती को फांसी की सजा, क्रूरता की दास्तां सुन कांप जाएगी रूह
: यूपी के बांदा जिले की विशेष पॉक्सो अदालत ने एक क्रूर और घिनौने मामले में दो दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है। इस मामले में निलंबित सिंचाई विभाग के जेई रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को 34 बच्चों के यौन शोषण और उनके अश्लील वीडियो व तस्वीरें वायरल करने के आरोप में दोषी पाया गया। कोर्ट ने इसे एक जघन्यतम अपराध करार देते हुए इन दोषियों को सख्त सजा दी। अदालत ने यह भी आदेश दिया कि राज्य सरकार पीड़ित बच्चों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा दे और आरोपियों के घर से बरामद राशि को बच्चों में वितरित किया जाए।
जघन्य अपराध का खुलासा
यह मामला तब सामने आया जब इंटरपोल ने दिल्ली स्थित सीबीआई कार्यालय को एक विस्तृत ई-मेल के माध्यम से शिकायत भेजी। इसमें बताया गया था कि रामभवन तीन मोबाइल नंबरों के जरिए डार्क वेब पर बच्चों के अश्लील वीडियो और तस्वीरें बेच रहा था। इसके बाद, सीबीआई ने इस मामले की जांच शुरू की, और साक्ष्य जुटाए, जिससे यह साबित हुआ कि यह एक अंतरराष्ट्रीय बाल यौन शोषण रैकेट है।
गंभीर साक्ष्य और शारीरिक शोषण का खुलासा
सीबीआई ने जांच में पाया कि आरोपी दंपती न केवल अपने आस-पास के बच्चों को शिकार बनाते थे, बल्कि अपने रिश्तेदारों के बच्चों को भी निशाना बनाते थे। उनके द्वारा किए गए कृत्य बच्चों के लिए न केवल मानसिक बल्कि शारीरिक रूप से भी अत्यंत गंभीर थे। पीड़ित बच्चों की हालत बहुत खराब थी, और कुछ बच्चों के शरीर पर गंभीर चोटें पाई गईं।
बच्चों को किया प्रताड़ित
वहीं कोर्ट में बयान देते वक्त बच्चें डरे-सहमे थे, लेकिन काफी दुलार और विश्वास दिलाने के बाद उन्होंने अपने साथ हुई घटना की जो दास्तां सुनाई वो सुनकर रूह कांप जाएगी। बच्चों ने बताया कि उनके साथ अश्लील व्यवहार किया जाता था। जब वे उसका विरोध करते थे तो उन्हें मारा-पीटा जाता था। बंधक बनाकर रखा जाता था। आरोपी महिला दरवाजा बंद कर देती थी।
अश्लील सामग्री का वैश्विक प्रसार
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी दंपती ने रूस, अमेरिका, लंदन और ऑस्ट्रेलिया सहित 12 देशों में अश्लील सामग्री भेजी थी। इसके जरिए वह कई देशों में बड़े पैमाने पर अवैध धन अर्जित कर रहे थे। उनके पास से बरामद वीडियो, तस्वीरें, लैपटॉप, मोबाइल फोन, मेमोरी कार्ड और पेन ड्राइव इस अपराध की भयावहता को उजागर करती हैं। इन उपकरणों में 34 वीडियो और 679 तस्वीरें मिलीं, जो इस अपराध की गंभीरता को दर्शाती हैं।
समाज की नैतिक नींव को हिला देने वाला अपराध
अदालत ने इस अपराध को दुर्लभ से दुर्लभतम श्रेणी का अपराध माना। विशेष पॉक्सो अदालत के न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा ने कहा कि यह अपराध न केवल पीड़ित बच्चों के जीवन को प्रभावित करता है, बल्कि समाज की नैतिक नींव को भी हिला देता है। उन्होंने कहा कि ऐसे अपराधों के खिलाफ कड़ी सजा दी जानी चाहिए ताकि यह समाज के लिए एक कड़ा संदेश हो।
आरोपियों का अडिग बचाव
सजा सुनाए जाने के बाद, रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती ने अपनी निर्दोषता का दावा किया। रामभवन ने कहा कि उसे जबरन फंसाया गया है, जबकि दुर्गावती ने इसे न्याय की गलत व्याख्या बताया और उच्च न्यायालय में अपील करने की बात कही। उनके परिवार के कुछ सदस्य भी फैसले का विरोध कर रहे थे, हालांकि उन्होंने अपने नाम छिपाए रखे।
सीबीआई की पांच वर्षों की जांच
इस मामले में सीबीआई ने करीब पांच वर्षों तक गहन जांच की और 990 पन्नों की रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की। इसमें आरोपी दंपती की भूमिका, उनकी गतिविधियां और उनके द्वारा किए गए अपराधों की पूरी कहानी सामने आई। इस मामले ने न केवल यूपी बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है।
