किसी भी उम्र वर्ग को हो सकता है इनफ्लुएंजा संक्रमण, जानें इसकी वजहें, लक्षण और टीके के बारे में
पिछले दो साल रेस्पेरेटरी वायरल इंफेक्शन को लेकर रियलिटी चेक रहे हैं। जबकि मौजूदा कोविड-19 महामारी ने इस श्वसन संक्रमण की ओर ध्यान दिलाया है, वहीं अन्य श्वसन रोगों को लेकर भी चिंताएं पैदा हो रही हैं, जैसे कि इन्फ्लुएंजा। आमतौर पर ‘फ्लू’ के रूप में जाना जाने वाला, इन्फ्लुएंजा एक अत्यधिक संक्रामक वायरल संक्रमण है, जो किसी के रेस्पेरेटरी ट्रैक्ट को प्रभावित करता है। यह विभिन्न परिसंचारी इन्फ्लूएंजा वायरस के कारण होता है – जिसमें एच1एन1, इन्फ्लुएंजा ए, बी और काफी सारी परेशानियां शामिल हैं।
इन्फ्लुएंजा फैलने की वजहें
जब संक्रमित लोग खांसते, छींकते या बात करते हैं, तो हवा में ड्रॉपलेट के माध्यम से इन्फ्लुएंजा और कोविड-19, दोनों आसानी से फैलते हैं। संचरण के इस तरीके के कारण, रोजमर्रा की सार्वजनिक सेटिंग्स (स्कूलों से लेकर सभाओं तक) और समूह गतिविधियां (जैसे खेलने का समय), सभी ऐसे माहौल के रूप में काम करते हैं जहां एक बच्चे को फ्लू होने का खतरा हो सकता है।
लक्षण
ये वायरस हल्के से गंभीर लक्षण पैदा करते हैं जो एक-दूसरे से मिलते-जुलते होते हैं, जिनमें बुखार, खांसी या गले में खराश, सांस लेने में कठिनाई, थकान, मांसपेशियों या शरीर में दर्द, सिरदर्द और बहती या भरी हुई नाक शामिल हैं।
यह अच्छी बात है कि डब्ल्यूएचओ द्वारा अनुशंसित इन्फ्लूएंजा टीकों के नये स्ट्रेन की मदद से इन्फ्लूएंजा को प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है। कोविड-19 के साथ ओवरलैप कर रहे लक्षणों को कम करने में भी टीकाकरण से मदद मिल सकती है।
इन्फ्लूएंजा में, पांच साल से कम उम्र के बच्चों और विशेष रूप से दो साल 3 से कम उम्र के बच्चों के लिये अस्पताल में भर्ती होने या मृत्यु का जोखिम पैदा करती हैं। राज्यों द्वारा स्कूलों को फिर से खोलने पर विचार करने से इन्फ्लूएंजा संक्रमण अस्पताल में भर्ती होने या मृत्यु दर जैसी परेशानियों का खतरा भी काफी बढ़ जाता है। टीकाकरण इसके खिलाफ 4 महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रदान करता है। ऐसा देखते हुए, इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स द्वारा अपने नियमित टीकाकरण 5 कार्यक्रम के अंतर्गत 6 महीने से 5 वर्ष की आयु के बच्चों के लिये वार्षिक इन्फ्लूएंजा टीकाकरण करवाने की सलाह दी है।
एक मुश्किल लड़ाई: टीकाकरण कवरेज बढ़ाना
हालांकि, कोविड-19 वैक्सीन जरूरी नहीं कि भविष्य में होने वाले संक्रमण को रोक सके, लेकिन यह निश्चित रूप से बीमारी के गंभीर रूप होने या इससे मरने की संभावना को कम करता है। इसी तरह, शोध के अनुसार, फ्लू के टीके का प्रभाव अलग-अलग होता है, एक फ्लू शॉट फ्लू से संबंधित बीमारी के जोखिम को लगभग 40 से 60% 6 तक कम कर देता है। लेकिन अधिक महत्वपूर्ण रूप से, यह फ्लू से संबंधित परेशानियों से बचने में मदद कर सकता है, विशेष रूप से फ्लू के मौसम के दौरान देश की स्वास्थ्य प्रणालियों पर बोझ को कम कर सकता है।
इन्फ्लुएंजा के टीके सभी आयु वर्ग के लोगों के लिये फायदेमंद होते हैं, लेकिन टीकाकरण के लिये विशेष रूप से अनुशंसित प्राथमिकता वाले समूहों में पांच साल से कम उम्र के बच्चे, बुजुर्ग, डायबिटीज, गर्भवती महिलाएं और स्वास्थ्य कर्मी या संस्थागत सेटिंग्स में काम करने वाले जोखिम वाले व्यक्ति शामिल हैं। वैक्सीनेशन के साथ, संक्रमण से बचाव के लिये सुरक्षात्मक उपाय अपनाना (और बच्चों को इसका अभ्यास करने के लिये प्रेरित करना)- इसके अंतर्गत हाथ धोना, व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखना, श्वसन संबंधी शिष्टाचार (छींकने या खांसने के दौरान मुंह या नाक का ढंकना) भी जरूरी है।
(डॉ. सुहास प्रभु, कंसल्टेंट पीडियाट्रिशियन, हिंदुजा हॉस्पिटल, मुंबई, चेयरमैन, पीडियाट्रिक कोविड-19 टास्क फोर्स, महाराष्ट्र से बातचीत पर आधारित)
