14 July, 2026 (Tuesday)

सुनेत्रा पवार के NCP अध्यक्ष बनने पर घमासान, पार्टी को मिला 15 दिनों में नए चुनाव कराने का अल्टीमेटम

सुनेत्रा पवार के एनसीपी की अध्यक्ष चुने जाने को पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने चुनौती दी है। उन्होंने कानूनी नोटिस जारी कर चुनाव नए सिरे से कराने की मांग की है। नोटिस में दावा किया गया है कि 26 फरवरी को हुआ चुनाव असंवैधानिक था और इसे अमान्य घोषित किया जाना चाहिए।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। महाराष्ट्र की डिप्टी सीएम और दिवंगत अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने को लेकर पार्टी के ही एक वरिष्ठ नेता ने सवाल उठा दिए हैं और 15 दिनों के भीतर नए सिरे से चुनाव कराने की मांग की है। वहीं, पार्टी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए चुनाव को पूरी तरह नियमानुसार बताया है।
क्या है पूरा मामला?
पार्टी के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय सचिव सच्चिदानंद सिंह ने दिल्ली की लॉ फर्म एआरएस एसोसिएट्स के माध्यम एक नोटिस भेजकर 26 फरवरी 2026 को हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव को अवैध बताया है। यह नोटिस 9 जुलाई को सुनेत्रा पवार (अध्यक्ष), प्रफुल्ल पटेल (कार्यकारी अध्यक्ष) और बृजमोहन श्रीवास्तव (पार्टी सचिव) को भेजा गया है।

सच्चिदानंद सिंह का दावा है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव पार्टी के संविधान के अनुसार नहीं हुआ है, इसलिए इसे अमान्य घोषित किया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की है कि एक स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव अधिकारी की देखरेख में नए सिरे से चुनाव कराए जाएं और तब तक नए पदाधिकारियों की सूची को भी रद्द माना जाए।

चुनौती के पीछे के कारण
यह कानूनी विवाद 28 जनवरी 2026 को अजित पवार के निधन के बाद शुरू हुआ। सिंह के मुताबिक, पार्टी ने 17 फरवरी 2026 को चुनाव आयोग को एक संशोधित संविधान सौंपा था। इसके तहत राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुने जाने तक कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल को अध्यक्ष की सभी शक्तियां दी गई थीं। सिंह का तर्क है कि संशोधित संविधान के अनुसार, केवल प्रफुल्ल पटेल के पास ही राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाने का अधिकार था। ऐसे में पार्टी महासचिव बृजमोहन श्रीवास्तव ने 26 फरवरी की बैठक कैसे बुलाई? नोटिस में आरोप लगाया गया है कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाने को लेकर 18 फरवरी को चुनाव आयोग को भेजे गए पत्र को तत्कालीन कार्यकारिणी सदस्यों की मंजूरी नहीं थी, जिससे बाद में हुए चुनाव की वैधता पर सवाल उठते हैं।

सिंह का दावा है कि न तो केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण का गठन किया गया, न निर्वाचन अधिकारी नियुक्त हुआ और न ही कोई चुनाव कार्यक्रम घोषित किया गया। प्रतिनिधियों को नामांकन करने या मतदान करने का अवसर ही नहीं मिला। नोटिस में मांग की गई है कि चुनाव आयोग को भेजे गए सभी पत्रों को वापस लिया जाए। यदि 15 दिनों में नए सिरे से चुनाव की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई, तो याचिकाकर्ता ने अदालत का रुख करने की चेतावनी दी है।

विरोध पर एनसीपी का आया बयान
पार्टी के भीतर से उठे इन विरोध के स्वरों पर एनसीपी प्रवक्ता सूरज चव्हाण ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा, “सच्चिदानंद सिंह खुद 26 फरवरी को आयोजित राष्ट्रीय अधिवेशन में मौजूद थे। उन्होंने खुद हाथ उठाकर सुनेत्रा पवार के पक्ष में मतदान किया था। उनके चुनाव में सभी नियमों और संवैधानिक प्रावधानों का पूरी तरह पालन किया गया था।”

बता दें कि सच्चिदानंद सिंह वर्तमान में एनसीपी के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष हैं और पिछले 15 सालों से संगठन से जुड़े हुए हैं। दिसंबर 2023 में कर्जत की बैठक में दिवंगत अजित पवार ने उन्हें राष्ट्रीय सचिव नियुक्त किया था। हालांकि, वह 26 फरवरी 2026 को बैठक करने वाली कार्यकारिणी समिति के सदस्य नहीं थे।

अजित पवार की मौत के बाद राजनीतिक जिम्मेदारी संभाल रहीं सुनेत्रा पवार
जनवरी 2026 में अजित पवार की एक विमान हादसे में अचानक मौत हो गई थी, जिसके बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार ने उनकी राजनीतिक जिम्मेदारी संभाली। वे महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री बनीं और उन्हें सरकार में खेल, अल्पसंख्यक विकास और उत्पाद शुल्क जैसे बड़े मंत्रालयों का कार्यभार मिला। इसके साथ ही, वे अपनी पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष भी चुनी गईं। चुनावों की बात करें तो, अजित पवार की मौत के बाद खाली हुई बारामती विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में सुनेत्रा पवार ने जीत हासिल की और विधायक बनीं।

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