10 March, 2026 (Tuesday)

प्रीडायबिटीज पर काबू से घट सकता है दिल की बीमारियों का खतरा: शोध

नई दिल्ली (ईएमएस)। जिन प्रीडायबिटिक मरीजों ने अपने ब्लड शुगर लेवल को सामान्य स्तर पर ला लिया, उनमें हार्ट फेलियर, दिल की बीमारी से मौत या अस्पताल में भर्ती होने का जोखिम करीब 60 प्रतिशत तक कम हो गया। यह दावा किया है शोधकर्ता वैज्ञानिकों ने। ताजा अध्ययन के मुताबिक, जिन लोगों ने प्रभावी ढंग से प्रीडायबिटीज से छुटकारा पा लिया था, उनमें कार्डियोवैस्कुलर कारणों से मौत या हार्ट फेलियर के चलते अस्पताल में भर्ती होने का खतरा 58 प्रतिशत तक कम पाया गया। यूके के किंग्स कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं का कहना है कि ब्लड ग्लूकोज को सामान्य स्तर पर लाने का यह सकारात्मक असर दशकों तक बना रह सकता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि शुरुआती चरण में ब्लड शुगर को नियंत्रित करने से हृदय स्वास्थ्य पर लंबे समय तक स्थायी लाभ मिल सकता है।
यह खोज इसलिए भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि हाल के वर्षों में कई अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि केवल जीवनशैली में बदलाव जैसे एक्सरसाइज करना, वजन कम करना और खानपान में सुधार प्रीडायबिटीज वाले लोगों में दिल की बीमारियों के जोखिम को जरूरी नहीं कि कम कर दें। यानी स्वस्थ जीवनशैली अपनाना फायदेमंद तो है, लेकिन सिर्फ उसी के भरोसे दिल के खतरे पूरी तरह टाले नहीं जा सकते। किंग्स कॉलेज लंदन और यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल ट्यूबिंजन में डायबिटीज के रीडर और इस स्टडी के प्रमुख लेखक डॉ. एंड्रियास बिर्केनफेल्ड ने कहा कि यह शोध प्रिवेंटिव मेडिसिन से जुड़ी एक आम धारणा को चुनौती देता है। उनके अनुसार, वर्षों से यह माना जाता रहा है कि प्रीडायबिटीज वाले लोग अगर वजन घटा लें, नियमित व्यायाम करें और हेल्दी डाइट अपनाएं, तो वे हार्ट अटैक और समय से पहले मौत से बच सकते हैं।
हालांकि ये उपाय सेहत के लिए जरूरी हैं, लेकिन मौजूदा सबूत यह नहीं दिखाते कि केवल इनसे ही दिल के दौरे या मृत्यु दर में कमी आती है। डॉ. बिर्केनफेल्ड ने कहा कि इस अध्ययन में यह स्पष्ट हुआ है कि असल फर्क तब पड़ता है, जब प्रीडायबिटीज पूरी तरह रिवर्स हो जाती है। यानी ब्लड शुगर का स्तर दोबारा सामान्य हो जाए। ऐसे मामलों में जानलेवा हृदय घटनाओं, हार्ट फेलियर और सभी कारणों से होने वाली मौतों में उल्लेखनीय कमी देखी गई। प्रीडायबिटीज वह अवस्था होती है, जिसमें ब्लड ग्लूकोज का स्तर सामान्य से अधिक होता है, लेकिन अभी इतना नहीं बढ़ा होता कि टाइप-2 डायबिटीज का निदान किया जा सके।

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