पुलिस ने की थी मनमानी, एसआइटी ने कब्जे में ली थाने की जीप
मनीष गुप्ता हत्याकांड की जांच करने गोरखपुर पहुंची एसआइटी रविवार की सुबह ही सक्रिय हो गई। सर्किट हाउस में मीटिंग करने के बाद विवेचक और फोरेंसिक टीम के साथ अपर आयुक्त आनंद प्रकाश तिवारी रामगढ़ताल थाने पहुंचे। पत्रावली देखने के साथ ही एसआइटी ने थाने की जीप को कब्जे में ले लिया। फोरेंसिक टीम ने बेंजाडिन टेस्ट के लिए जीप से नमूना एकत्र किया। छानबीन करने टीम क्राइम ब्रांच के आफिस, मानसी हास्पिटल और बीआरडी मेडिकल कालेज भी पहुंची। जांच में रामगढ़ताल पुलिस द्वारा होटल में मनमानी किए जाने का प्रमाण मिला है।
थाने, क्राइम ब्रांच, हास्पिटल व मेडिकल जाकर की जांच
रविवार को कानपुर की एसआइटी रामगढ़ताल थाने पहुंची। टीम का नेतृत्व कर रहे अपर पुलिस आयुक्त आनंद तिवारी ने एक घंटे तक पत्रावली का अवलोकन करने के साथ ही कार्यालय में तैनात पुलिसकर्मियों का बयान लिया।उनसे पूछा गया कि 27 सितंबर की रात में तत्कालीन थाना प्रभारी जगत नारायण सिंह, उप निरीक्षक अक्षय मिश्रा, विजय यादव थाने से कब निकले थे। होटल में चेकिंग करने निकलने की सूचना जीडी में दर्ज है या नहीं इसको देखा। दोपहर 1.30 बजे थाने से निकलने के बाद अपर पुलिस आयुक्त अपनी टीम के साथ क्राइम ब्रांच के कार्यालय पहुंचे।
एसपी क्राइम डा. एमपी सिंह के साथ ही क्राइम ब्रांच की एसआइटी के विवेचक व सदस्यों से तीन घंटे तक बातचीत कर विवेचना में सामने आए तथ्य की जानकारी ली। शाम पांच बजे एसआइटी मानसी हास्पिटल रही। रात में ड्यूटी पर मौजूद डाक्टर व स्वास्थ्यकर्मियों से 10 मिनट तक बातचीत की। वहां से निकलने के बाद फोरेंसिक टीम के साथ एसआइटी शाम 5.20 बजे मेडिकल कालेज पहुंची। 27 सितंबर की रात इमरजेंसी में ड्यूटी पर मौजूद डाक्टर, नर्स व स्वास्थ्यकर्मियाें से मामले की जानकारी लेने के साथ ही उनका बयान दर्ज किया। देर शाम तक एसआइटी की छानबीन जारी रही।
पहले अज्ञात फिर नाम से बना भर्ती पर्चा
मनीष गुप्ता को रामगढ़ताल पुलिस 27 सितंबर की रात में 2.10 बजे लेकर मेडिकल कालेज पहुंची थी।थाने के उप निरीक्षक अजय कुमार ने अज्ञात बताकर इमरजेंसी में दाखिल कराया था। कुछ देर रामगढ़ताल थानेदार जगत नारायण सिंह पहुंचे। जिसके बाद 2.15 बजे मनीष गुप्ता के नाम से इमरजेंसी में भर्ती का दूसरा पर्चा बना। जांच के बाद डाक्टरों ने 2.35 बजे मनीष गुप्ता को मृत घोषित कर दिया था।
