नगर निगम भी शुरु करेगा गौरैया संरक्षण अभियान पार्कों में घौंसले और चैराहों पर लगाये जायेंगे स्टेचू रसायनिक खाद और बदलती जीवन शैली पशु पक्षियों के लिए बन रहे खतरा
सहारनपुर। नगर निगम भी गौरैया संरक्षण अभियान शुरु करेगा। इसके लिए शहर के पार्को और अन्य उपयुक्त स्थानों पर घौंसलें लगाये जायेंगे तथा चैराहों पर गौरैया (हाउस स्पैरो) का स्टेच्यू भी लगवाया जायेगा। नगरायुक्त ज्ञानेन्द्र सिंह ने यह जानकारी सोमवार को विश्व गौरैया दिवस के उपलक्ष्य में गिल काॅलोनी स्थित केसीसीपी आर्य कन्या इंटर काॅलेज में नगर निगम व शाकुंभरी डेन नेटवर्क सहारनपुर द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही। कार्यक्रम का शुभारंभ नगरायुक्त ज्ञानेंद्र सिंह, के सी सी पी आर्य कन्या काॅलेज के प्रबंधक केशोराम शर्मा, आवास परिषद के आवास अधिकारी अरिमर्दन सिंह गौर, प्रख्यात चिकित्सक डाॅ.वर्षा अग्रवाल, टीम पाॅजेटिव के विकास शर्मा ने माँ शारदा के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर किया।
नगरायुक्त ज्ञानेन्द्र सिंह ने कहा कि यदि प्रकृति अव्यवस्थित होती है तो मानव जीवन भी अव्यवस्थित हो जाता है। उन्होंने लोगों से गौरैया को बचाने का आह्वान करते हुए कहा कि एक पक्षी को बचाने का अर्थ प्रकृति को बचाना है। प्रकृति ईश्वर का रुप है, यदि हम प्रकृति की सेवा करते हैं तो ईश्वर की सेवा करते हैं। उन्होंने कहा कि विदेशों में लोग प्रकृति के नज़दीक आ रहे है, लेकिन भारत में लोग प्रकृति से दूर जा रहे हैं। यही कारण है भारत में समस्याएं बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि यदि हमें अपना पर्यावरण सुधारना और संरक्षित करना है तो स्वच्छता को संस्कारों में ढ़ालकर प्लास्टिक पर निर्भरता कम करनी होगी। उन्होंने अधिक से अधिक पेड़ लगाने पर जोर दिया और छात्राओं को नकारात्मक विचारों से दूरी बनाकर किताबों से दोस्ती करने का सुझाव दिया।
इससे पूर्व पर्यावरणीय जागरुकता एवं मूल्य चेतना प्रकोष्ठ संस्कृत विश्वविद्यालय हरिद्वार के नोडल अधिकारी डाॅ. विनय सेठी ने गौरैया के लुप्त होने के कारणों की जानकारी देते हुए कहा कि बढ़ती जनसंख्या, खेतों में अंधाधंुध रसायनिक खादों का प्रयोग, मोबाइल टावरों का रेडिएशन तथा हमारे घरों की संरचना और हमारी जीवन शैली बदलने का ही परिणाम है मानव जीवन से जुड़ी गौरैया, राष्ट्रीय पक्षी मोर तथा राष्ट्रीय पशु बाघ आज संकट में है। डाॅ.सेठी ने बताया कि विदेशों में गौरैया को लेकर जबरदस्त चिन्ता है और वहां जागरुकता के लिए सार्वजनिक चैराहों पर गौरैया के स्टेचू लगाये जा रहे है। लेकिन भारत में अभी इस दिशा में कोई ज्यादा जागरुकता नहीं है। उन्होंने कहा कि अभी वक्त है कि हम गौरैया को बचाने के प्रयास शुरु करें अन्यथा वह दिन दूर नहीं जब गौरैया भी पैसेंजर पिगन की तरह धरती से लुप्त हो जायेगी। उन्होंने कहा कि यदि पक्षियों की संख्या घटती दिखायी दे तो समझ जाना चाहिए कि धरती की तबियत ठीक नहीं है।
साहित्यकार डाॅ. वीरेन्द्र आजम, अरिमर्दन सिंह गौर, डाॅ.वर्षा अग्रवाल व प्रधानाचार्य श्रीमती अंजु त्यागी ने भी संबोधित किया। संयोजक विकास शर्मा द्वारा नगरायुक्त ज्ञानेंद्र सिंह व अरिमर्दन सिंह को स्मृति चिह्न भी भेंट किये गए। कार्यक्रम में प्रेमकुमार शर्मा, जसविंदर स्याल, मौ.अली आदि भी मौजूद रहे। संचालन राजेंद्र कुमार ने किया।
