लखनऊ : गन्ने के बकाया भुगतान की मांग को लेकर आज DM कार्यालय पर जुटेंगे किसान
गन्ने के समर्थन मूल्य में वृद्धि करने, गन्ना का बकाया भुगतान करने और धान क्रय केंद्रों संचालन की व्यवस्था दुरुस्त करने समेत कई मांगों को लेकर किसान सोमवार को जिलाधिकारी कार्यालय के सामने धरना देंगे। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के जिलाध्यक्ष सरदार गुरमीत ने बताया कि बिजली कटौती समेत किसानों की समस्याओं को लेकर हर जिले में धरना प्रदर्शन होगा। मांगें पूरी होने तक प्रदर्शन जारी रहेगा।
उर्वरक में कमी के साथ सिंचाई कम लगेगा पानी
राजधानी स्थित भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान ने गन्ने की सात नई प्रजातियों काे विकसित किया है। शीघ्र ही यह किसानों के लिए उपलब्ध होगी। चार प्रजातियां उत्तर भारतीय जमीन के अनुरूप और तीन दक्षिण भारत की जलवायु के अनुरूप तैयार की गई हैं। संस्थान के निदेशक डॉ.एडी पाठक ने बताया कि नई प्रजाजियों से चीनी की मात्रा में बढ़ोतरी के साथी ही गन्ने के उत्पादन में भी 10 से 20 फीसद तक इजाफा हाेगा। गन्ने के विकास को लेकर संस्थान की ओर से समय-समय पर शोध किए जाते हैं। कई वर्षों की मेहनत के बाद नई प्रजातियां विकसित होती हैं। ड्रिप विधि से गन्ने की सिंचाई पानी की मात्रा को कम करेगी। उत्पादन में वृद्धि के साथ ही इन नई प्रजातियों की देखभाल करने में भी किसानों को कम मेहनत करनी पड़ेगी।
ये हैं गन्ने की नई प्रजातियां
उत्तर भारत के लिए
- सीओएलके14204
- सीओ15023
- सीओपीबी14185
- सीओएसई11453
दक्षिण भारत के लिए
- एमएस130081
- वीएसआइ12121
केले में कीट एवं बीमारियों के रुकने से बढ़ेगा उत्पादन
उत्तर प्रदेश में केले का उत्पादन बढ़ाकर किसानों की आय दोगनी की जा सकती है ऐसे में किसान भाइयों को समय से अपनी फसल में कीटों बीमारियों का प्रबंध कर लेना चाहिए जिससे उत्पादन भी बढ़ेगा और किसानों की आय भी बढ़ेगी। यह ऐसी फसल है एक बार रोपाई कर दी जाए और सही फसल प्रबंधन किया जाए तो अधिकतम चार बार इस की पेडीं ली जा सकती है। बक्शी का तालाब के चंद्र भानु गुप्ता कृषि स्नातकोत्तर महाविद्यालय के सहायक आचार्य डॉ.सत्येंद्र कुमार सिंह किसानों को जानकारी दे रहे थे।उन्होंने बतायाकि उत्तर प्रदेश प्रमुख जिले सीतापुर,लखीमपुर बहराइच, पीलीभीत, बाराबंकी, लखनऊ,बनारस व जौनपुर में केले की जी-9 का है अधिक प्रचलन है। केले में प्रमुख रूप से इस समय कीट एवं बीमारियों का अधिक प्रकोप होता है, इसका समय से प्रबंधन कर किसान अधिक लाभ उठा सकते हैं। यह एक ऐसी फसल है जो किसानों की आय बढ़ाने में तथा किसान को आत्मनिर्भर बनाने में सफल हो सकती है। जड़ बेधक वीविल काले रंग के होती हैं, इनके ऊपर कठोर काला आवरण पाया जाता है, इस कीट के प्रौढ़ मे काटने चबाने वाले मुखांग होते हैं।
