06 June, 2026 (Saturday)

बलिया का ‘नारद इफेक्ट’: पूर्वांचल में कितना निकालेगा साइकिल की हवा, कमल को कितना देगा खाद-पानी?

बलियाः जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव अपने अंतिम चरण में पहुंच रहा है. वैसे-वैसे राजनीतिक उठापटक देखने को मिल रही है. इसी कड़ी में बलिया लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी को बड़ा झटका लगा है. पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री नारद राय के बागी होने से समाजवादी की साइकिल की रफ्तार पर ब्रेक लगने की अटकलें लगाई जा रही हैं. दरअसल, यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ, जब सोमवार को बलिया में पार्टी के प्रत्याशी सनातन पांडे के समर्थन में हुई रैली के दौरान अखिलेश यादव ने मंच से सभी नेताओं का नाम लिया. लेकिन नारद राय का नाम नहीं लिया. इससे खफा होकर नारद राय ने बागी तेवर अपनाते हुए भाजपा का दामन थामने का मन बना लिया है.

नारद राय की भूमिहार समाज में बड़ी पैठ
अपने समर्थकों के साथ बैठक के बाद साइकिल में ताला लगाने के साथ नारद राय ने भाजपा को जिताने की अपील कर दी. बता दें कि नारद राय भूमिहार समाज के बड़े नेता माने जाते हैं और भूमिहार समाज पूर्वांचल की कई सीटों पर अपनी पैठ बनाए हुए हैं, जिनमें बलिया, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, वाराणसी, जौनपुर, देवरिया, मिर्जापुर, चंदौली, भदोही, महाराजगंज, गोरखपुर और संत कबीर नगर जिला शामिल है. छात्र नेता के तौर पर राजनीति की शुरुआत करने वाले नारद राय को संगठन का कुशल नेता और स्ट्रैटिजिस्ट माना जाता है.

अमित शाह से नारद राय ने की मुलाकात
नारद राय की अपनी समर्थकों के साथ पूरी बैठक फेसबुक पर लाइव चली. इस दौरान नारद राय ने राष्ट्रीय और जिला नेतृत्व पर उपेक्षा और अपमानित करने का आरोप लगाया. इसके बाद उन्होंने रात में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात भी की. इस दौरान सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और यूपी सरकार के कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर भी मौजूद रहे.

मुलाकात के बाद नारद राय ने किया ट्वीट
मुलाकात के बाद नारद राय ने ट्वीट करते हुए लिखा, ‘दुनिया में भारत का डंका बजाने वाले माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी और भारत के यशस्वी गृह मंत्री, राजनीति के चाणक्य माननीय अमित शाह जी के संकल्प की समाज के अंतिम पंक्ति में बसे ग़रीब को मज़बूत करने वाली सोच और राष्ट्रवादी विचारधारा को मज़बूत करूँगा. जय जय श्री राम.’

ब्राह्मण मतदाता बलिया में ताकतवर
बता दें कि नारद राय भूमिहार समाज के बड़े नेता माने जाते हैं. ऐसे में बलिया का सियासी समीकरण समाजवादी पार्टी के लिए खराब होता हुआ नजर आ रहा है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बलिया में ब्राह्मण 15.5 प्रतिशत, भूमिहार 8.9 प्रतिशत, राजपूत, 13.8 प्रतिशत, ओबीसी 15.3 प्रतिशत, मुसलमान 6.59 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति 3.4 प्रतिशत, राजभर 4.90 फीसदी, निषाद 3.3, कुशवाहा 4.1 और कुर्मी 3.4 प्रतिशत हैं.

नीरज शेखर की राह हुई आसान
बता दें कि सपा के उम्मीदवार ब्राह्मण जाति से हैं. जबकि भाजपा के उम्मीदवार नीरज शेखर राजपूत जाति से आते हैं. ऐसे में ग्राउंड रिपोर्ट की बात करें तो सनातन पांडे के पक्ष में ब्राह्मण मतदाताओं के लामबंद होने से नीरज शेखर की राह मुश्किल हो रही थी. लेकिन नारद राय के आने से अब नीरज शेखर की राह आसान होती हुई नजर आ रही है.

भाजपा हैट्रिक लगाने की कोशिश में जुटी
हालांकि 2014 और 2019 लोकसभा चुनाव में बलिया लोकसभा सीट पर भाजपा का कब्जा रहा है. अब भाजपा यहां से हैट्रिक लगाने की कोशिश में जुटी हुई हैं. बलिया लोकसभा सीट पर ब्राह्मणों की आबादी सबसे अधिक है. बलिया लोकसभा क्षेत्र में बैरिया, बलिया नगर और फेफना तथा गाजीपुर जिले की जहुराबाद और मुहम्मादाबाद विधानसभा सीटें आती हैं.

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