02 April, 2026 (Thursday)

CM पद छोड़ने के बाद भी नीतीश की सुरक्षा में लगे रहेंगे NSG कमांडो? Z+ सिक्योरिटी को लेकर हुआ बड़ा फैसला

बिहार की राजनीति में हो रहे बड़े बदलाओं के बीच नीतीश कुमार की सिक्योरिटी को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए नीतीश कुमार ने सोमवार को बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश की सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला हुआ है। मुख्यमंत्री का पद छोड़ने के बाद भी नीतीश कुमार को जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा मिलती रहेगी। गृह विभाग की विशेष शाखा ने इससे जुड़ा आदेश जारी किया है। इस आदेश में कहा गया है कि नीतीश कुमार को बिहार स्पेशल सिक्योरिटी एक्ट-2000 के तहत सुरक्षा अनुमान्य है।
10 NSG समेत 55 सिक्योरिटी पर्सन रहेंगे तैनात
बिहार सरकार के गृह विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी की है। अधिसूचना में नीतीश कुमार के आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे भी का जिक्र है। इस आदेश से यह भी स्पष्ट हो गया है कि नीतीश कुमार जल्द ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे। मुख्यमंत्री पद छोड़ने की स्थिति में सुरक्षा में कोई चूक न हो, इसके लिए जेड प्लस कैटेगरी की पुख्ता व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत उनके घेरे में 55 सुरक्षाकर्मी तैनात होंगे, जिनमें 10 से अधिक NSG (नेशनल सिक्योरिटी गार्ड) कमांडो शामिल होंगे।
पुलिस महानिदेशक को लिखा पत्र
पुलिस महानिदेशक को लिखे गए पत्र में कहा गया है, “बिहार स्पेशल सिक्योरिटी एक्ट- 2000 के तहत नीतीश कुमार को सुरक्षा दी जाएगी। नीतीश कुमार वर्तमान में राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं। आने वाले समय में बिहार विधान परिषद की सदस्यता और मुख्यमंत्री पद से त्याग-पत्र देकर राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करेंगे।” अधिसूचना में कहा गया है नीतीश कुमार की सुरक्षा की समीक्षा के बाद Z+ कैटेगरी की सुरक्षा देने का फैसला लिया गया है।
जल्द देने वाले हैं CM पद से इस्तीफा
बता दें कि इस महीने की शुरुआत में राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार द्वारा बिहार विधान परिषद की सदस्यता छोड़ने के फैसले के बाद राज्य के नए मुख्यमंत्री को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। नीतीश कुमार के करीबी सहयोगी पिछले कुछ समय से संवैधानिक प्रावधानों का हवाला देते हुए संकेत दे रहे हैं कि कोई व्यक्ति विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य न रहने के बाद भी 6 महीने तक मुख्यमंत्री पद पर बना रह सकता है।

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