05 June, 2026 (Friday)

Vivah Panchami 2025: विवाह पंचमी श्रीराम-सीता के मिलन का पर्व, जानें महत्व और कैसे पड़ा इसका नाम?

Ram-Sita Vivah: विवाह पंचमी मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी को मनाया जाने वाला पावन पर्व है, जो प्रभु श्रीराम और माता सीता के विवाह की स्मृति में है. यह दिन मर्यादा, धर्म और आदर्श का प्रतीक है. इस तिथि पर राम-सीता की पूजा से विवाह संबंधी बाधाएं दूर होती हैं.
Vivah Panchami 2025: विवाह पंचमी श्रीराम-सीता के मिलन का पर्व, जानें महत्व और कैसे पड़ा इसका नाम?
विवाह पंचमी 2025

विवाह पंचमी मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला अत्यंत शुभ और पावन पर्व है. इस साल विवाह पंचमी 25 नवंबर यानी आज मंगलवार को पड़ी है. इस तिथि का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि त्रेतायुग में इसी दिन प्रभु श्रीराम का विवाह माता सीता के साथ मिथिला में संपन्न हुआ था.

रामसीता विवाह को मर्यादा, धर्म, आदर्श और समर्पण का सर्वोच्च उदाहरण माना जाता है इसलिए इस तिथि को उनके दैवी मिलन की स्मृति में विशेष पूजा, पाठ और उत्सवों के साथ मनाया जाता है.

श्रीरामसीता विवाह का पौराणिक प्रसंग
माना जाता है कि माता सीता के स्वयंवर में श्रीराम ने सहजता से भगवान शिव के धनुष को उठाकर प्रत्यंचा चढ़ाई, जिससे धनुष भंग हो गया. इसके बाद जनकपुरी में उल्लास फैल गया और माता सीता ने प्रभु श्रीराम के गले में वरमाला डालकर अपने जीवन का संपूर्ण समर्पण किया. राजा जनक ने स्वयंवर की सूचना अयोध्या भेजी, जिसके बाद महाराज दशरथ की भव्य बारात मिथिला पहुंची. वेदमंत्रों, यज्ञविधि और वैदिक परंपराओं के बीच रामसीता का दिव्य विवाह संपन्न हुआ. इसी अवसर को स्मरण करने के लिए हर वर्ष मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी को विवाह पंचमी मनाई जाती है.

विवाह पंचमी क्यों मनाते हैं?
धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान राम और माता सीता की पूजा करने से विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और सौभाग्य की वृद्धि होती है. कई स्थानों पर रामचरितमानस के विवाह प्रसंग का पाठ, जानकी मंगला, मंगलगीत और रामसीता विवाह की झांकियां आयोजित की जाती हैं. मिथिला और अयोध्या में तो यह दिन आज भी एक बड़े उत्सव की तरह मनाया जाता है.

कैसे पड़ा विवाह पंचमी नाम?
इस तिथि का नाम दो शब्दों से मिलकर बना है.पहला, विवाह है, जोकि श्रीरामसीता का पवित्र विवाह है. दूसरा, पंचमी है, इस दिन यह विवाह हुआ था क्योंकि यह दिव्य विवाह मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी को संपन्न हुआ था इसलिए इस तिथि को विवाह पंचमी नाम मिला. रामायण, पुराणों और लोककथाओं में इस पंचमी को भगवान राम और माता सीता के वैवाहिक मिलन का मूल दिवस बताया गया है. इसी कारण यह तिथि धार्मिक रूप से अत्यंत शुभ मानी जाती है.

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