06 June, 2026 (Saturday)

UPSC Prelims Answer Key: यूपीएससी अब प्रीलिम्स के बाद जारी करेगा आंसर-की, याचिका के आगे झुका आयोग

UPSC Prelims Answer Key: यूपीएससी अब सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के तुरंत बाद आंसर-की जारी करेगा. अभी तक पूरी परीक्षा प्रक्रिया के बाद जारी करता था.

UPSC Prelims Answer Key: यूपीएससी अब आंसर-की प्रीलिम्स परीक्षा समाप्त होने के बाद ही जारी कर देगा. अभी तक आयोग इसे पूरी परीक्षा प्रक्रिया संपन्न होने के बाद जारी करता था. आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में यह बात सुप्रीम कोर्ट में एक काउंटर एफिडेविट में कही है. यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की आंसर-की पूरी प्रक्रिया संपन्न होने के बाद आंसर-की जारी करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है.
अदालत ने इससे पहले इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता जयदीप गुप्ता को न्यायमित्र और अधिवक्ता प्रांजल किशोर को उनकी सहायता के लिए नियुक्त किया था. न्यायमित्र ने सुझाव दिया था कि प्रीलिम्स परीक्षा की आंसर-की परीक्षा आयोजित होने के अगले दिन ही प्रकाशित की जानी चाहिए.

आयोग ने पहले बताया था प्रतिकूल परिणाम वाला
आयोग ने 13 मई को दायर एक हलफनामे में कहा था कि यदि इस सुझाव को लागू किया जाता है, तो यह प्रतिकूल परिणाम देने वाला हो सकता है. इससे परीक्षा को अंतिम रूप देने में अनिश्चितता और देरी होगी. हालांकि, आयोग ने 20 सितंबर को दायर एक नए हलफनामे में कहा कि रिट याचिका के लंबित रहने के दौरान यूपीएससी ने माननीय न्यायमित्र के सुझाव सहित विभिन्न कारकों पर विचार-विमर्श किया. जिसके बाद प्रोविजनल आंसर-की प्रीलिम्स परीक्षा बाद जारी करने का निर्णय लिया गया है.

हलफनामे में आगे कहा गया है कि परीक्षा में उपस्थित होने वाले उम्मीदवारों से आपत्तियां मांगी जाएंगी. प्रत्येक आपत्ति के समर्थन में तीन प्रमाणिक स्रोत होने चाहिए. जिन आपत्तियों का समर्थन नहीं किया जाता, उन्हें तुरंत खारिज कर दिया जाना चाहिए. हालांकि, आयोग यह तय करेगा कि प्रस्तुत स्रोत प्रमाणिक है या नहीं. आयोग ने कहा कि प्रश्नपत्र और आंस-की पर अभ्यर्थियों ने प्राप्त आपत्तियों को संबंधित विषय विशेषज्ञों की एक टीम के समक्ष रखा जाएगा. जो सभी पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श करेंगे और आंसर-की को अंतिम रूप देंगे. जिसके आधार पर रिजल्ट जारी होगा.

याचिका में क्या कहा गया?

सुप्रीम कोर्ट में वकील सरोज त्रिपाठी और राजीव दुबे के माध्यम से दायर याचिका में तर्क दिया गया है कि सिविल सेवा परीक्षा की पूरी प्रक्रिया समाप्त होने के बाद प्रीलिम्स के अंक, कट-ऑफ मार्क्स और आंसर-की जारी करने का कोई कारण और तुक नहीं है. सिवाय इसके कि इसका एकमात्र उद्देश्य असफल उम्मीदवारों के किसी भी प्रभावी उपाय की तलाश करने के कारण को, चाहे वह किसना भी वास्तविक क्यों न हो, विफल करना है.
याचिका में कहा गया है कि उन्हें यह जानने का भी अधिकार है कि जिन उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया था, उनके अंक वास्तव में अधिक थे और इसके लिए वे चयन के अधिक योग्य थे.

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