05 June, 2026 (Friday)

Treta Yug Ki Katha: वो प्रतापी राजा, जिसने रावण को पराजित कर 6 माह कैद रखा था, जानें पूरी कथा

Sahastrabahu Arjuna Aur Ravan Ke Yudh Ki Katha: रावण और बाली के युद्ध की कहानी तो सब जानते हैं, लेकिन बाली के अलावा एक प्रतापी राजा और थे, जिनसे रावण हाराया था. इतना ही नहीं उन्होंने रावण को बंदी तक बना लिया था. आइए इस कथा के बारे में जानते हैं.
Treta Yug Ki Katha: वो प्रतापी राजा, जिसने रावण को पराजित कर 6 माह कैद रखा था, जानें पूरी कथा
सहस्त्रबाहु अर्जुन और रावण के युद्ध की कथा

Sahastrabahu Arjuna Aur Ravan Ki Katha: रावण त्रिलोक विजेता था. वो बहुत शक्तिशाली था. उसकी शक्तियों को देखकर देवता भी उससे घबराते थे. वो बहुत बड़ा शिव भक्त था. उसने अपने शीश काटकर भगवान शंकर को चढ़ाए थे. रावण ने महादेव और ब्रह्मा जी की कठोर तपस्या की थी और वरदान हासिल किए थे. इन्हीं वरदानों और शक्तियों की वजह से रावण अंहकार में डूब गया था.

अंहकार के कारण रावण स्वयं को सबसे अधिक बलशाली मानने लगा था, लेकिन सुग्रीव के भाई बाली से वो पराजित हुआ था. रावण और बाली के युद्ध की कहानी तो सब जानते हैं, लेकिन बाली के अलावा एक प्रतापी राजा और थे, जिनसे रावण हाराया था. इतना ही नहीं उन्होंने रावण को बंदी तक बना लिया था. आइए इस कथा के बारे में जानते हैं.

पौराणिक कथा के अनुसार…
पौराणिक कथा के अनुसार, त्रेता युग में कार्तवीर्य सहस्त्रबाहु अर्जुन नाम के एक प्रतापी राजा थे. उनको कार्तवीर्य अर्जुन के नाम से भी जाना जाता है. सहस्त्रबाहु अर्जुन को भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र का अवतार मानकर भगवान का दर्जा दिया गया है. वो हैहय वंश कुल में महाराज कार्तविर्य के घर माता पद्मिनी के गर्भ से जन्मे थे. वो मध्य प्रदेश के खरगोन की पवित्र नगरी महेश्वर (प्राचीन नाम माहिष्मती) के राजा बने. सहस्त्रबाहु अर्जुन बहुत बलशाली थे.

लंकापति रावण ने जब सहस्त्रबाहु अर्जुन की वीरता के बारे में जाना तो वह उनको हराने के लिए उनके नगर जा पहुंचा. वहां पहुंचकर रावण ने नर्मदा किनारे शिव जी को प्रसन्न करने और वरदान मांगने के लिए तप करना शुरू कर दिया. थोड़ी दूर पर सहस्त्रबाहु अर्जुन अपने पत्नियों के साथ नर्मदा नदी में स्नान करने के लिए पहुंच गए.

सहस्त्रबाहु अर्जुन और रावण के बीच हुआ युद्ध
वे वहां जलक्रीड़ा करने लगे और अपनी हजार भुजाओं से नर्मदा नदी के प्रवाह को रोक दिया. नदी का प्रवाह रुका तो उसका जल किनारों से बहने लगा, जिस कारण रावण की तपस्या में विघ्न पड़ गया. इससे रावण क्रोधित हो गया और सहस्त्रबाहु अर्जुन से युद्ध शुरू कर दिया. फिर सहस्त्रबाहु अर्जुन ने रावण को युद्ध में बुरी तरह से परास्त कर दिया और बंदी बना लिया.

माहिष्मती नगरी में छह महीने तक कारावास में सहस्त्रबाहु अर्जुन ने रावण को बंदी बनाकर रखा था. बाद में रावण के दादा महर्षि पुलस्त्य के आग्रह पर रावण को छोड़ा गया था.

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