06 June, 2026 (Saturday)

माता-पिता की इन 4 गलतियों से बच्चा बन जाता है जिद्दी, डॉक्टर ने कहा कभी ना करें ये पैरेंटिंग मिस्टेक्स

Parenting Mistakes: बच्चे अक्सर ही जरूरत से ज्यादा जिद्द करने लगते हैं. कभी बीच सड़क लेट जाते हैं तो कभी किसी चीज को पाने के लिए खाने-पीने से मना करने लगते हैं. ऐसे में डॉक्टर बता रहे हैं कि माता-पिता की कौन सी गलतियां बच्चे को जिद्दी बना देती हैं.

Parenting: परवरिश ऐसी चीज है जो सभी अलग-अलग तरह से करते हैं और इन तरीकों के परिणाम भी अलग-अलग निकलते हैं. कोई बच्चे को बहुत ज्यादा लाड़ करता है और कोई सख्ती बरतता है. ऐसे में पैरेंट्स कई बार यह समझ नहीं पाते कि उनकी ही कुछ गलतियां (Parenting Mistakes) उनके बच्चे को जिद्दी (Stubborn) बनाने लगती हैं. इसी बारे में बता रहे हैं डॉ. देवेन्द्र डांगर. अपने इंस्टाग्राम पर डॉक्टर ने इस वीडियो को शेयर करके बताया है कि पैरेंट्स को किन गलतियों को करने से परहेज करना चाहिए.

क्यों बन जाता है बच्चा जिद्दी
डॉक्टर बताते हैं कि पैरेंट्स को लगता है कि बच्चा ऐसा ही है लेकिन ज्यादातर गलती माता-पिता की ही होती है.

बहुत ज्यादा कमांड देना – बच्चे को हर बात पर टोकना या यह कहना कि ये मत करो, वहां मत जाओ या अभी सुनो वगैरह बच्चे को प्रभावित करता है. बच्चे का दिमाग कंट्रोल के लिए तैयार नहीं होता इसलिए वो नेचुरली बात मानने से इंकार करता है.

अपनी बात पर टिके ना रहना – कभी किसी बात को मान जाना और कभी उसी बात के लिए डांटना इनकंसिस्टेंसी है. डॉक्टर कहते हैं कि बच्चे को अगर आप अपने मूड के हिसाब से चीजों के लिए हां और ना कहोगे तो वो और ज्यादा परेशान और कंफ्यूज हो जाएगा.

इमोशंस को इग्नोर करना – जब बच्चा दुखी होता है और हम सिर्फ बिहेवियर सुधारने की कोशिश करते हैं तो बच्चा सुनना बंद कर देता है.

बहुत ज्यादा स्क्रीन टाइम – बच्चे को जरूरत से ज्यादा स्क्रीन टाइम देना यानी फोन में लगे रहने देना उसे जिद्दी बना सकता है. टीवी, आइपैड या मोबाइल बच्चे को स्क्रीन के पीछे की एक काल्पनिक दुनिया में डाल देते हैं. इससे बच्चे को नॉर्मल लाइफ बोरिंग और स्लो लगने लगती है.

जिद्दी बच्चे से कैसे करें डील

बच्चे से बहस करने के बजाय उसकी बात सुनें.
बच्चे को डांटें नहीं बल्कि वह जिद्द क्यों कर रहा है यह समझने की कोशिश करें.
बच्चे को कमांड ना दें बल्कि ऑप्शन दें कि ऐसा नहीं तो वैसा करो.
शांत रहें और बच्चे पर चिल्लाएं नहीं.
बच्चे से इमोशनल कनेक्शन बनाने की कोशिश करें.

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