05 June, 2026 (Friday)

डूबते करियर में पत्नी बनी स्टारकिड का सहारा, फिर किया ऐसा कमबैक कि हिल गए दिग्गजों के सिंहासन

बॉबी देओल ने हाल ही में अपने बुरे समय के बारे में खुलकर बात की। साथ ही आप की अदालत शो में अपनी पत्नी की भी जमकर तारीफ की है।
बॉबी देओल ने अपने करियर में अब तक कई तरह के पड़ाव देख लिए हैं। बतौर स्टारकिड सुपरहिट डेब्यू करने वाले बॉबी के करियर में एक दौर ऐसा भी आया था जब उनके पास कोई काम नहीं था। फिल्में नहीं होने पर बॉबी सारा दिन घर पर बैठकर शराब पीते रहते थे। लेकिन उस दौर में भी उनकी पत्नी ने उनका साथ नहीं छोड़ा और मुसीबत के दिनों में खड़ी रहीं। इसके बाद बॉबी ने ऐसा कमबैक किया कि दिग्गजों के सिंहासन हिल गए।

आप की अदालत में खोले राज
हाल ही में इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा के साथ ‘आप की अदालत’ में हुई बातचीत में बॉबी ने अपने जीवन के उस कठिन दौर के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने स्वीकार किया कि अपने करियर में आई गिरावट के दौरान, उन्होंने असफलता और आत्मसंदेह की भावनाओं से निपटने के लिए शराब का सहारा लिया। उन्होंने शराब की लत से उबरने में मदद करने के लिए अपनी पत्नी तानिया देओल को श्रेय दिया। उन्होंने उन अफवाहों को भी खारिज कर दिया कि उनके बुरे दौर में तानिया ने उन्हें छोड़ दिया था, और कहा कि वह हमेशा उनके साथ खड़ी रहीं। बॉबी देओल ने बताया कि उन मुश्किल सालों में उनकी पत्नी तान्या ने अहम भूमिका निभाई, यहां तक ​​कि जब उनके पास कोई काम नहीं था, तब उन्होंने घर की जिम्मेदारियां और आर्थिक मामले भी संभाले। उन्होंने खुलासा किया कि एक अहम मोड़ तब आया जब उनके बच्चों ने उनसे सवाल करना शुरू कर दिया, जिससे उन्हें अपनी जिंदगी की बागडोर अपने हाथ में लेने और खुद पर काम करने की प्रेरणा मिली।

खुद पर खाने लगे थे तरस
बॉबी देओल ने कहा, ‘जब आप हार मान लेते हैं, तो आप खुद पर तरस खाने लगते हैं। यह मानवीय स्वभाव है। आपको लगता है कि आपकी दुनिया खत्म हो गई है, कोई आपको पसंद नहीं करता, और फिर आप कुछ ऐसी चीजों के आदी हो जाते हैं जो आपको सुकून देती हैं। मेरे पिता को भी शराब पीने की आदत थी, और मैंने भी पीना शुरू कर दिया और मुझे इसकी लत लग गई। लेकिन मेरी पत्नी ने मुझे इससे बाहर निकाला।’ उन्होंने आगे कहा, ‘अगर तान्या मेरी जिंदगी में नहीं होती, तो मैं आज यहां नहीं बैठा होता। उन्होंने घर का सारा खर्च संभाला। वह काम करती थीं और घर के सारे खर्चे उठाती थीं। जब मेरे बच्चों ने मुझसे पूछना शुरू किया कि मैं हमेशा घर पर क्यों बैठा रहता हूं और उनकी मां ऑफिस जाती हैं, तब मेरे अंदर कुछ बदल गया और मैंने खुद पर काम करने का फैसला किया।’

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