07 March, 2026 (Saturday)

Sankashti Chaturthi 2026: फरवरी में कब है संकष्टी चतुर्थी? जानें डेट, पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और महत्व

Dwijapriya Sankashti Chaturthi 2026 Kab Hai: फाल्गुन माह की संकष्टी चतुर्थी द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी कहलाती है. ऐसे में आइए जानते हैं कि फरवरी माह में संकष्टी चतुर्थी का व्रत किस दिन रखा जाएगा? साथ ही जानते हैं कि इसका शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व.
Sankashti Chaturthi 2026: फरवरी में कब है संकष्टी चतुर्थी? जानें डेट, पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और महत्व
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2026
Sankashti Chaturthi 2026: सनातन धर्म में हर माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि बड़ी विशेष मानी जाती है. ये तिथि विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य भगवान गणेश को समर्पित की गई है. इस दिन भगवान गणेश का विधि-विधान से पूजन और व्रत किया जाता है. गणपति जी प्रसन्न होकर अपने भक्तों के जीवन से सभी संकट दूर करते हैं. जीवन में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है.

फाल्गुन माह की संकष्टी चतुर्थी द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी कहलाती है. ऐसे में आइए जानते हैं कि फरवरी माह में संकष्टी चतुर्थी का व्रत किस दिन रखा जाएगा? साथ ही जानते हैं कि इसका शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व.

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2026 शुभ मुहूर्त (Dwijapriya Sankashti Chaturthi 2026 Subh Muhurat)
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी व्रत के दिन सुबह 5 बजकर 22 मिनट से लेकर सुबह 6 बजकर 15 मिनट तक ब्रह्म मुहूर्त रहने वाला है. इसके अलावा शुभ-उत्तम मुहूर्त सुबह 7 बजकर 7 मिनट पर शुरू होगा. ये मुहूर्त सुबह 8 बजकर 29 मिनट तक रहने वाला है. इस दिन अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 13 मिनट पर शुरू होगा. ये मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 57 मिनट तक रहेगा. अगर ब्रह्म और शुभ-उत्तम मुहूर्त में पूजा न कर पाएं तो अभिजीत मुहूर्त पूजा की जा सकती है.

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि (Dwijapriya Sankashti Chaturthi Puja Vidhi)
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पर सुबह स्नान आदि करने के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें और मंदिर को स्वच्छ करें.
इसके बाद हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प करें. फिर एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर गणेश जी की मूर्ति स्थापित करें.
इसके बाद गणेश जी को सिंदूर, चंदन, अक्षत, फल, फूल और दूर्वा अर्पित करें.
इसके बाद घी का दीपक जलाएं और मोदक का भोग लगाएं.
फिर संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा पढ़े और गणेश जी की आरती करें.
इसके बाद दिनभर फलाहार करें और रात्रि के समय चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण करें.
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का महत्व (Dwijapriya Sankashti Chaturthi Significance)
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी के दिन गणेश जी की पूजा करने से सभी कष्टों और संकटों का अंत होता है. व्रत करने से जीवन सुख, समृद्धि, ज्ञान, बुद्धि, शुभता आती है. गणेश जी सभी विघ्न को दूर करते हैं.

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed