11 March, 2026 (Wednesday)

भारत से खरीदी ब्रह्मोस मिसाइल को फिलीपींस ने चीन के खिलाफ तैनात किया

बीजिंग (ईएमएस)। भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने के बाद फिलीपींस ने उस मिसाइल को चीन की तरफ मुंह मोड़कर तैनात किया है। फिलीपींस की तरफ से वीडियो जारी किया है, जिसमें घातक ब्रह्मोस एंटी-शिप क्रूज मिसाइल का प्रदर्शन किया है। ये पहली बार है जब फिलीपींस ने ब्रह्मोस मिसाइल का सार्वजनिक प्रदर्शन किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, फिलीपीन मरीन कॉर्प्स ने कथित तौर पर ब्रह्मोस क्रूज मिसाइलों से लैस एक नई एंटी-शिप मिसाइल यूनिट का अनावरण किया है।

जारी वीडियो में, प्रत्येक लॉन्चर दो ब्रह्मोस मिसाइलों से लैस दिखाई दे रहा था, जबकि रीलोडिंग कैरियर में चार अतिरिक्त मिसाइलें थीं। फिलीपींस की तटीय रक्षा रेजिमेंट ने बताया है, कि प्रत्येक फिलीपीन मरीन कॉर्प्स ब्रह्मोस बैटरी में दो मोबाइल ऑटोनॉमस लॉन्चर, एक रडार वाहन, एक मिसाइल रीलोडर और एक कमांड और कंट्रोल ट्रक होगा।

फिलीपींस ने वीडियो को तब जारी किया है, जब चीन ने हैनान प्रांत के सान्या में आयोजित कार्यक्रम में फुजियान एयरक्राफ्ट कैरियर को नौसेना में शामिल किया है। चीन में ही बने फ्लैटटॉप एयरक्राफ्ट कैरियर को नौसेना में शामिल करने को पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी बलों की क्षमता में एक बड़े एडवांसमेंट के रूप में देखा जा रहा है। फिलीपींस ने ब्रह्मोस मिसाइल के तट-आधारित, जहाज-रोधी वैरिएंट की तीन बैटरियों के लिए भारत के साथ 375 मिलियन अमेरिकी डॉलर के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। भारत के अलावा ब्रह्मोस मिसाइल का इस्तेमाल करने वाला फिलीपींस दूसरा देश है।

बता दें कि ब्रह्मोस मिसाइस की पहली खेप को भारत ने फिलीपींस को सौंपा था, वहीं दूसरी खेप 2025 के अप्रैल में पहुंची है। तीसरी खेप अगले महीने सौंपने की संभावना है। फिलीपींस मरीन कॉर्प्स ने ब्रह्मोस को जाम्बालेस स्थित नौसैनिक ठिकाने पर तैनात किया है, जो स्कारबोरो शोअल से महज 220 किलोमीटर दूर है। ये वही इलाका जहां चीन ने 2012 में कब्जा किया था। यह रणनीतिक दूरी मिसाइल की 290 किमी की रेंज के भीतर है, यानी जरूरत पड़ने पर चीन की कोस्ट गार्ड या मिलिशिया नौकाओं को सीधे निशाने पर लिया जा सकता है।

ब्रह्मोस की सबसे बड़ी ताकत उसकी गति है। इसके अलावा इसमें 200–300 किलो वॉरहेड क्षमता है, जो दुश्मन को पलटवार का मौका ही नहीं देती। इसकी टर्मिनल फ्लाइट प्रोफाइल बेहद कम ऊंचाई (सिर्फ 10 मीटर) पर होती है, जिससे रडार पर पकड़ना लगभग असंभव हो जाता है। इसी वजह से इसे गेम-चेंजर कहा जा रहा है। चीन के पास ऐसा कोई एयर डिफेंस सिस्टम नहीं है, जो ब्रह्मोस को इंटरसेप्ट कर सके।

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