07 June, 2026 (Sunday)

जेफ बेजोस का महंगा अंतरिक्ष सफर, 60 सेकंड में खर्च हुए 4 हजार करोड़ रुपये, जानें मिशन की कुल लागत

ब्लू ओरिजिन (Blue Origin) ने 20 जुलाई को न्यू शेफर्ड (New Shepard) कैप्सूल से चार निजी यात्रियों को अंतरिक्ष की यात्रा कराई। करीब 10 मिनट धरती के बाहर स्पेस की सीमा में बिताने के बाद उनका कैप्सूल धरती पर लौट आया। इन यात्रियों में जेफ बेजोस, मार्क बेजोस, वैली फंक और ओलिवर डैमेन शामिल थे। अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस में अंतरिक्ष में कदम रखने वाले सबसे अमीर शख्स बन गए। उनका यह अनुभव अपने आप में तो ऐतिहासिक था। लेकिन क्‍या आपको पता है कि इस मिशन में कितना खर्च हुआ। इस मिशन की कुल क‍ितनी लागत आई। आखिर बेजोस ने इस मिशन पर क्‍यों पानी की तरह बहाया पैसा।

10 मिनट में 40 हजार करोड़ हुए खर्च

डेलीमेल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बेजोस के इस 10 मिनट के सफर में अरबों रुपये खर्च हुए। केवल 10 मिनट में 5.5 अरब डॉलर यानी कम से कम 40 हजार करोड़ की लागत आई है। इस पर हर मिनट 4 हजार करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इस मिशन की कीमत से पता चलता है कि क्यों दुनिया के अरबपति ही इस तरह का कारनामा कर सकते हैं। इस फ्लाइट पर जेफ के साथ उनके भाई मार्क और एविएशन एक्सपर्ट वॉली फंक भी गई थीं। इन तीनों के अलावा चौथी सीट के लिए टिकट की नीलामी की गई थी।

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स्पेस में इंडस्ट्रीज स्थापित करना चाहते है बेजोस

हालांकि, बेजोश के इस  अंतरिक्ष मिशन की लागत को लेकर निंदा हो रही है। यह सवाल उठाए जा रहे हैं कि इतनी सी ट्रिप के लिए इतने पैसे खर्च करना कितना उचित है। इस निंदा के बाद बेजोस ने कहा कि उनका यह मिशन एकदम सही है। यह भविष्‍य के लिए है। उन्‍होंने कहा, वह आगे चलकर स्पेस में इंडस्ट्रीज स्थापित करना चाहते हैं, जिससे धरती का पर्यावरण खराब न हो।

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20 जुलाई ब्लू ओरिजिन की ऐतिहासिक उड़ान

गौरतलब है कि ब्लू ओरिजिन की यह उड़ान 20 जुलाई को शाम 6.42 मिनट पर लॉन्च हुई। रॉकेट तेजी से ऊपर गया, जब तक उसका ईंधन इस्तेमाल होता रहा। इसके बाद वह कैप्सूल से अलग हो गया। बूस्टर दोबारा इस्तेमाल के लिए धरती पर लौट आया और कैप्सूल ने कारमान लाइन (Karman Line) को पार कर लिया। कुछ मिनट बिना ग्रैविटी के रहने के बाद ऐस्ट्रोनॉट्स को लेकर कैप्सूल भी वापस लैंड हो गया। इन चारों लोगों ने 100 किलोमीटर ऊपर कारमान लाइन को पार किया। बता दें कि अंतरिक्ष की सीमा की शुरुआत कारमान लाइन से ही होती है। इसे ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अंतरिक्ष की सीमा कहा जाता है।

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