05 June, 2026 (Friday)

भारत बन रहा ग्लोबल डेटा सेंटर पावरहाउस, जानें क्या है इसके मायने, क्या होगा फायदा?

भारत में डेटा सेंटर का इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से डेवलप किया जा रहा है। बड़ी टेक कंपनियां इसके लिए बड़ा निवेश करने जा रही हैं। आने वाले कुछ सालों में भारत डेटा सेंटर पावरहाउस बनने वाला है। इसका क्या फायदा होगा, आइए जानते हैं…
भारत में टेक्नोलॉजी के इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने के लिए तेजी से काम किया जा रहा है। आने वाले समय में भारत AI और डेटा सेंटर का ग्लोबल हब बनने वाला है। एआई और क्लाउड स्टोरेज की वजह से भारत का डिजिटल इकोनॉमी तेजी से ग्रोथ हो सकता है। सरकार की कई योजनाएं बड़ी टेक कंपनियों को भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप करने के लिए आकर्षित कर रही है। इस समय मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद और नोएडा जैसे शहरों में डेटा सेंटर बनाए जा रहे हैं। इनमें यूजर्स का डेटा लोकली स्टोर किया जाएगा।
क्यों बनाए जा रहे हैं डेटा सेंटर?
सरकार 2030 तक भारत में डेटा सेंटर की क्षमता को तीन गुना करने का लक्ष्य रखा है। सरकार की पॉलिसी, घरेलू डिमांड और निवेश का फायदा मिलने वाला है। बड़ी टेक कंपनियां गूगल, मेटा और माइक्रोसॉफ्ट ने इसके लिए करोड़ों रुपये निवेश करने का ऐलान कर दिया है। भारतीय यूजर्स का डेटा लोकली स्टोर किए जाने वाली सरकार की पॉलिसी की वजह से इन कंपनियों को यहां लोकल डेटा सेंटर बनाना पड़ रहा है। ये डेटा सेंटर देश के बड़े शहरों राजधानी दिल्ली के पास नोएडा, हैदराबाद, मुंबई, चेन्नई, विशाखापत्तनम में बनाए जा रहे हैं।

टेक कंपनी गूगल का फोकस पूर्वी भारत में है, जिसकी वजह से कंपनी विशाखापत्तनम में अपना डेटा सेंटर हब बना रही है। गूगल अमेरिका से विशाखापत्तनम के बीच सबस्टेंशियल कैपेसिटी वाला सबसी केबल बिछाने का फैसला किया है। इसका फायदा देश में डेटा स्टोर करने से लेकर इसकी निगरानी के लिए जॉब क्रिएशन में भी होगा, जो लोकल इकोनॉमी को बढ़ाने का काम करेगा।
टेक कंपनियां कर रही बड़ा निवेश
Google के अलावा माइक्रोसॉफ्ट, मेटा जैसी दिग्गज कंपनियां भारत में डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए 200 बिलियन डॉलर तक निवेश कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, एआई की बढ़ती लोकप्रियता की वजह से भारी मात्रा में डेटा की खपत हो रही है। जेनरेटिव एआई बनाने वाली कंपनियों को भी तेजी से डेटा सेंटर बनाने की जरूरत पड़ गई है। भारत इस समय दुनिया का 20% डेटा जेनरेट करता है। इस डेटा को लोकली स्टोर करने के लिए डेटा सेंटर बनाए गए हैं। आने वाले समय में डेटा जेनरेशन तेजी से बढ़ने वाला है, जिसकी वजह से भारी मात्रा में डेटा सेंटर की जरूरत होगी।

एआई की बढ़ रही डिमांड
भारत के AI मिशन ने भी डेटा सेंटर के एक्सपेंशन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। हाल में हुए इंडिया एआई समिट में दुनियाभर की बड़ी टेक कंपनियों के CEO भारत आए थे। गूगल, मेटा, माइक्रोसॉफ्ट, ओपनएआई, एंथ्रोपिक जैसी कंपनियों के सीईओ ने इस दौरान भारत में डेटा स्टोर करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट करने की बात कही थी। भारत की कंपनियां भी यहां डेटा सेंटर बनाने के लिए बड़ी मात्रा में निवेश करने जा रही हैं। फरवरी 2026 में अडानी ग्रुप इसके लिए 100 बिलियन डॉलर निवेश करने जा रही है। अडानी ग्रुप का एआई रेडी डेटा सेंटर 2035 तक बनाया जाएगा, जो रिन्यूएबल पावर्ड सिस्टम पर बेस्ड होगा।

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