06 June, 2026 (Saturday)

कैसे जापान के एक कॉमिक हीरो ने पेरू के युवाओं को सड़कों पर उतार दिया?

नेपाल, इंडोनेशिया, मेडागास्कर के बाद अब पेरू में भ्रष्टाचार और नई पेंशन नीति के खिलाफ GenZ सड़कों पर है. इस आंदोलन का प्रतीक बना जापानी कॉमिक वन पीस का किरदार लूफी, जो आज़ादी और न्याय की लड़ाई का प्रतीक है.
दक्षिण अमेरिकी देश पेरू एक बार फिर विरोध की लपटों में घिर गया है. राजधानी लिमा समेत कई शहरों में हजारों युवा सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं. वजह है-भ्रष्टाचार, आर्थिक असुरक्षा और सरकार द्वारा लागू की गई नई पेंशन नीति.
इस बार आंदोलन की सबसे खास बात यह है कि इसका प्रतीक कोई राजनीतिक झंडा नहीं, बल्कि जापान की मशहूर ऐनिमे सीरीज़ वन पीस का किरदार मंकी डी. लूफी बना है. यही एनिमे कैरेक्टर नेपाल, इंडोनेशिया के प्रदर्शनों में भी विरोध का प्रतीक बना था.
कैसे शुरू हुआ आंदोलन
10 अक्टूबर को नए राष्ट्रपति जोस जेरी ने सत्ता संभाली थी. संसद ने पूर्व राष्ट्रपति दीना बोलुआर्ते को हटाने के बाद जेरी को पद सौंपा, लेकिन सत्ता में आते ही उन्होंने पेंशन प्रणाली में बड़ा बदलाव किया. अब हर 18 साल से ऊपर के नागरिक के लिए पेंशन योजना से जुड़ना अनिवार्य कर दिया गया है.

पहले यह योजना वैकल्पिक थी, यानी कोई चाहे तो जुड़ सकता था या नहीं भी. लेकिन अब यह मजबूरी बन गई है. युवाओं का कहना है कि जब नौकरी ही नहीं है, तो वे हर महीने पेंशन में योगदान कैसे करें. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि यह कदम लोगों से जबरन वसूली जैसा है. कई निजी पेंशन प्रदाता संस्थाओं पर पहले से ही भ्रष्टाचार और फंड की पारदर्शिता न होने के आरोप हैं.

लूफी बना आजादी का प्रतीक
लूफी, वन पीस सीरीज का मुख्य किरदार है. एक समुद्री डाकू जो आजादी, न्याय और दोस्ती के लिए लड़ता है. पेरू के प्रदर्शनकारियों ने उसी की खोपड़ी वाली टोपी को अपने आंदोलन का प्रतीक बना लिया है. रैलियों में युवाओं के पोस्टर, मास्क और झंडों पर यही निशान दिख रहा है. इस प्रतीक ने आंदोलन को एक सांस्कृतिक रूप दे दिया है। सोशल मीडिया पर हैशटैग #LuffyPorLaLibertad (लूफी फॉर फ्रीडम) ट्रेंड कर रहा है.

राजनीतिक अस्थिरता और युवा गुस्सा
पेरू में बीते पांच सालों में छह राष्ट्रपति बदल चुके हैं. लगातार राजनीतिक उथल-पुथल, बढ़ता अपराध और बेरोजगारी ने युवाओं में गहरी नाराजगी भर दी है. देश की 27% आबादी 18 से 29 साल के बीच है यानी वही तबका जो अब सरकार के खिलाफ सड़कों पर है. प्रदर्शनों में हिंसा भी बढ़ रही है. गुरुवार को एक युवक की मौत हो गई, जबकि 100 से ज्यादा लोग घायल हुए, जिनमें पुलिस और पत्रकार भी शामिल हैं.

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