06 June, 2026 (Saturday)

इतिहास व संस्‍कृति में दिलचस्‍पी लेने वाले युवाओं को इसमें अपने करियर को आगे बढ़ाने के विकल्‍प

देश का युवा वर्ग आज खासतौर पर अपने इतिहास, संस्‍कति व प्राचीन विरासतों के बारे में जानने के लिए इच्छुक दिखाई दे रहा है। विज्ञान संकाय, इंजीनियरिंग व मेडिकल के छात्र सिविल सेवा या क्लैट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए इतिहास विषय का चयन पहले से करते आए हैं। इसके जरिये उन्‍हें वांछित सफलता भी मिलती रही है। अच्छी बात यह है कि विगत वर्षों में इतिहास एवं इससे संबंधित नये क्षेत्रों के विकास के कारण युवाओं के लिए सरकारी के अलावा निजी क्षेत्रों में भी अवसर बढ़े हैं।

दिल्ली कई बार टूटी है और फिर उठ खड़ी हुई है। इसका इतिहास गवाह है उन शख्सियतों का जो अपने दृढ़ संकल्प और हिम्मत से मुल्क के सम्राट, सुल्तान या बादशाह बने। ‘दिल्ली कारवां’ के संस्थापक एवं मुगल इतिहास में खास दिलचस्पी रखने वाले आसिफ अली जब सुल्तानों और उनके सुने-अनसुने किस्से सुनाते हैं, तब मौजूद युवाओं का समूह खामोशी से सब सुनता है। आसिफ की मानें, तो जब युवाओं को देसी माहौल, स्थानीय जुबान में ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक किस्से-कहानियां सुनने को मिलती हैं, तो उनमें इतिहास को जानने की रुचि पैदा होती है। दिल्ली यूनिवर्सिटी के खालसा कालेज में मध्यकालीन इतिहास के असिस्टेंट प्रोफेसर शाह नदीम सोहरावर्दी भी 2010 से दास्तानगोई कर रहे हैं। स्टूडेंट्स को कहानियों के माध्यम से इतिहास से रू-ब-रू कराते हैं। कालेज के ही असोसिएट प्रो. असद अहमद कहते हैं, ‘इतिहास में बहुत सी विधाएं हैं और बदलते दौर में निश्चित तौर पर युवाओं में इतिहास की पढ़ाई के प्रति रुझान देखा जा रहा है। वे अब इसे रटने वाला या बोरिंग विषय न मानकर इसे समझने की कोशिश कर रहे हैं। मेरे कई स्टूडेंट्स हैं, जिन्होंने विज्ञान में स्नातक करने के बावजूद इतिहास में मास्टर्स करने का निर्णय लिया है।‘

स्किल्स बढ़ाने में मददगार: प्रसिद्ध अफ्रीकी सिविल राइट्स एक्टिविस्ट एवं नीग्रो वर्ल्ड न्यूजपेपर के संस्थापक मारकस गार्वे का एक कथन है कि जिन लोगों को अपने पुरातन इतिहास, संस्कृति की जानकारी नहीं होती है,वे एक ऐसे वृक्ष के समान होते हैं,जिसकी जड़ें नहीं होतीं यानी इतिहास के अध्ययन से हम न सिर्फ प्राचीन सभ्यता, संस्कृति को जान पाते हैं, बल्कि उनके साथ एक संबंध स्थापित कर पाते हैं। इससे न सिर्फ विरासत के संरक्षण में मदद मिलती है, बल्कि भावी पीढ़ी तक सही जानकारी का संप्रेषण हो पाता है। पंजाब यूनिवर्सिटी के इतिहास के प्रोफेसर राजीव लोचन कहते हैं,‘इतिहास पढ़ने से स्टूडेंट्स की एनालिटिकल स्किल्स विकसित होती हैं, जिससे वे निर्णय लेने में सक्षम बनते हैं। इससे उनका ऐतिहासिक घटनाओं का ज्ञान बढ़ता है। तभी तो बहुत से स्टूडेंट्स सिविल सेवा, क्लैट एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए इतिहास का अध्ययन जरूर करते हैं। इतिहास में स्नातक, परास्नातक या पीएचडी करने के बाद उनके सामने पत्रकारिता, शिक्षा एवं राजनीति के क्षेत्र में भविष्य बनाने के सुनहरे अवसर होते हैं।’

हैं कई रोचक पहलू: विशेषज्ञों की मानें, तो इतिहास के अनेक रोचक पहलू हैं। स्टूडेंट्स अपनी पसंद के अनुसार, विशेषज्ञता के लिए पुरातत्व विज्ञान,एंथ्रोपोलाजी, जियोलाजी, विजुअल आर्ट, म्यूजियोलाजी आदि क्षेत्रों का चुनाव कर सकते हैं। वे चाहें, तो कार्बन डेटिंग, खनन, कंजर्वेशन को एक्सप्लोर कर सकते हैं। दरअसल, भारत के समृद्धशाली इतिहास को जानना एवं समझना काफी रुचिकर है। यहां की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों को संभालने के लिए विशेषज्ञों के साथ प्रशिक्षित पेशेवरों की आवश्यकता पड़ती है। इसलिए इतिहास में स्नातक या परास्नातक करने वालों को देश के प्राचीन, मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास के अलावा समकालीन एवं विश्व के अलग-अलग राष्ट्रों के इतिहास से भी परिचित कराया जाता है। उन्हें पुरातत्व विज्ञान, संग्रहालय विज्ञान, क्यूरेशन, कंजर्वेशन आदि की भी जानकारी दी जाती है। मास्टर्स में स्टूडेंट्स को किसी एक पेपर (भारतीय या विदेशी इतिहास) में विशेषज्ञता हासिल करने का मौका दिया जाता है।

म्यूजियोलाजी में संभावनाएं: प्राचीन अवशेषों एवं सामग्रियों को सुरक्षित रखकर संग्रहालय मानव इतिहास, संस्कृति और धर्म आदि की रक्षा में अहम भूमिका निभाते रहे हैं। क्या आप जानते हैं कि देश के किस संग्रहालय में विश्व का सबसे अधिक टेराकोटा कलेक्शन है? कहां की राक आर्ट गैलरी में भारत की प्राचीनतम प्री-हिस्टारिक केव पेंटिंग्स संग्रहित हैं? किस जगह महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की कोल्ट पिस्टल औऱ गांधी स्मृति वाहन (फोर्ड ट्रक जिससे गांधी जी की अस्थियों को संगम में विसर्जन के लिए ले जाया गया था) को सहेज कर रखा गया है? राष्ट्रीय महत्व का यह संग्रहालय उन चुनिंदा म्यूजियम में से एक है,जो सीधे भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अधीन आता है। जो आज न सिर्फ पुरातत्वविदों,कंजर्वेटर्स, इतिहासकारों,बल्कि दुनिया भर के शोधार्थियों, स्कालर्स के शोध का प्रमुख केंद्र बन चुका है। वह संग्रहालय है उत्तर प्रदेश का ‘इलाहाबाद म्यूजियम’। इसके अलावा, देश में सरकारी एवं निजी हजार से अधिक म्यूजियम हैं, जिनकी देखरेख के लिए प्रशिक्षित लोगों की आवश्यकता होती है। वरिष्ठ आर्ट क्यूरेटर अलका रघुवंशी के अनुसार, पश्चिमी देशों में संग्रहालय विज्ञान के अध्ययन में पहले से ही रुचि रही है। लेकिन अब भारत में भी यह लोकप्रिय हो रहा है यानी जैसे-जैसे इतिहास एवं विरासत के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ी है, वैसे-वैसे म्यूजियोलाजी अर्थात संग्रहालय विज्ञान के पेशेवरों की मांग में भी बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। उपयुक्त डिग्री हासिल करने के उपरांत उन्हें संग्रहालय निदेशक, क्यूरेटर, एजुकेटर, एग्जिबिशन डिजाइनर, आर्किविस्ट अथवा कंजर्वेशन स्पेशलिस्ट आदि की भूमिकाओं में कार्य करने का अवसर मिलता है। पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद युवा बतौर हेरिटेज मैनेजर भी करियर की शुरुआत कर सकते हैं। वहीं, शोध में दिलचस्पी रखने वाले इतिहासकार और इतिहास के प्राध्‍यापक के रूप में प्रसिद्धि पा सकते हैं।

प्रमुख संस्थान

हिंदू कालेज, दिल्ली

http://www.hinducollege.ac.in

मिरांडा हाउस, दिल्ली

https://www.mirandahouse.ac.in

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी

https://www.bhu.ac.in

क्राइस्ट यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु

https://www.christuniversity.in

मिलते हैं विविधतापूर्ण विकल्प: दिल्ली यूनिवर्सिटी के खालसा कालेज के इतिहास के असोसिएट प्रोफेसर प्रो. असद अहमद ने बताया कि इतिहास विषय के अध्ययन से स्टूडेंट्स का फलक बड़ा होता है। प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता में यह अहम भूमिका निभाता है, क्योंकि इन परीक्षाओं में करीब 30 प्रतिशत तक सवाल इतिहास से संबंधित होते हैं और उनमें भी भारतीय इतिहास से 80 प्रतिशत तक सवाल पूछे जाते हैं। पढ़ाई के बाद अवसरों की भी कमी नहीं है। स्टूडेंट्स पारंपरिक क्षेत्रों के अलावा पर्यटन, वकालत जैसे सेक्टर्स को एक्सप्लोर कर सकते हैं। मास्टर्स, बीएड, नेट-पीएचडी करने के बाद शिक्षण क्षेत्र में करियर बना सकते हैं। शोध कर सकते हैं। विशेषज्ञता हासिल कर संग्रहालयों एवं कला केंद्रों में अपने कौशल का लोहा मनवा सकते हैं। बतौर भाषाविद भी करियर को नया आयाम दे सकते हैं।

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