12 March, 2026 (Thursday)

एमपी में बिजली मीटरों का म्यूजियम

1990 के डायल मीटर से स्मार्ट मीटर तक का सफर, कबाड़ से संजोया अनोखा इतिहास
सतना/ईएमएस।आज की स्मार्ट दुनिया में तकनीक की रफ्तार ने हमारी जिंदगी के हर पहलू को बदला है, यहां तक कि हमारे घरों के बाहर लगे बिजली के मीटरों को भी। इन मीटरों ने बीते साढ़े तीन दशकों में कैसा सफर तय किया है? इसका जवाब सतना के पुराना पावर हाउस स्थित विद्युत ऑफिस में देखने को मिलता है, जहां अधिकारियों ने कबाड़ से एक अनोखा मॉडल तैयार किया है।यह दफ्तर बिजली मीटरों के एक अनूठे म्यूजियम या संग्रह का घर बन गया है, जो मीटरों के पूरे विकास क्रम को एक नजर में बयां करता है।

कबाड़ में जाते मीटरों से मिली प्रेरणा
इस अनूठे संग्रह का आईडिया कार्यपालन अभियंता (शहर) नीलाभ श्रीवास्तव को आया है। उन्होंने बताया कि इसकी प्रेरणा उन्हें स्टोर रूम में स्क्रैप (कबाड़) में पड़े पुराने, चलन से बाहर हो चुके मीटरों को देखकर मिली।नीलाभ श्रीवास्तव ने बातचीत के दौरान बताया की हम स्टोर में देखते थे कि पुराने मीटर स्क्रैब में आते और उनको स्टोर में रखा जाता था। हमें इसी से प्रेरणा मिली कि हम लोग इस तरह का एक मॉडल बनाएं जिसमें मीटर का एवोल्यूशन (विकास) किस तरह हुआ है।

1990 के डायल मीटर से स्मार्ट युग तक
इस दफ्तर के बाहर एक चेम्बर में इन मीटरों को एक फ्लो-चार्ट के रूप में करीने से सजाया गया है। इस संग्रह का सबसे पुराना सितारा 1990 का डायल आधारित इलेक्ट्रोमैकेनिकल इंडक्शन मीटर है, जो कभी साल 2000 तक घरों की पहचान हुआ करता था।इस मॉडल में 1990 के मीटर से लेकर आज के आधुनिक स्मार्ट डिजिटल मीटर तक, कुल 9 अलग-अलग प्रकार के (सिंगल और डबल फेस) मीटर शामिल हैं। यह संग्रह दिखाता है कि कैसे भारी-भरकम डायल वाले मीटर धीरे-धीरे डिजिटल और अब स्मार्ट हो गए।

सिर्फ म्यूजियम नहीं, जागरूकता का केंद्र भी
नीलाभ श्रीवास्तव के अनुसार, यह संग्रह सिर्फ एक म्यूजियम पीस नहीं है, बल्कि यह उपभोक्ताओं को जागरूक करने का एक बेहतरीन जरिया भी बन गया है।उन्होंने कहा, डायल मीटर से कैसे स्मार्ट मीटर में बदल गया, वो पूरा मॉडल में रखा गया है। जब लोग यहां आते हैं, तो उन्हें न केवल मीटरों का यह दिलचस्प इतिहास देखने को मिलता है, बल्कि उन्हें यह भी समझाया जाता है कि नए स्मार्ट मीटर कैसे काम करते हैं। उन्हें स्मार्ट बिजली एप्लिकेशन के बारे में भी जानकारी दी जाती है, जिससे वे खुद अपनी बिजली की खपत पर बारीकी से नजर रख सकते हैं।

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