10 March, 2026 (Tuesday)

Dussehra 2025: किन मुस्लिम देशों में होता है रावण का दहन? देख लें पूरी लिस्ट

Dussehra 2025: भारत के अलावा दशहरा कई और देशों में भी मनाया जाता है. आज हम जानेंगे उन मुस्लिम देशों के बारे में जहां पर दशहरा का त्योहार मनाया जाता है.

Dussehra 2025: दशहरा जिसे विजयदशमी के रूप में भी जाना जाता है भारत के सबसे लोकप्रिय त्योहारों में से एक है. यह पूरे देश में काफी श्रद्धा और धूमधाम के साथ मनाया जाता है. यह त्योहार उस दिन को याद करता है जब भगवान श्री राम ने रावण को हराया था. यह त्यौहार अच्छाई की बुराई पर जीत का प्रतीक है. आज हम जानेंगे कि यह त्योहार कौन से मुस्लिम देशों में भी मनाया जाता है.

पाकिस्तान में दशहरा

दशहरे का त्योहार कुछ उन देशों में मनाया जाता है जहां पर हिंदू समुदाय भी रहते हैं. इनमें से एक देश है पाकिस्तान. पाकिस्तान के सिंध जैसे क्षेत्रों में दशहरे का त्योहार मनाया जाता है. क्योंकि इन जगहों पर बड़ी संख्या में हिंदू रहते हैं. इस त्योहार पर रामलीला, मंदिरों में प्रार्थना और रावण दहन किया जाता है.

बांग्लादेश में दशहरा

वैसे तो बांग्लादेश में ज्यादातर लोग मुस्लिम है लेकिन दुर्गा पूजा हिंदू समुदाय का एक काफी बड़ा त्यौहार है. यहां पर दशहरा दुर्गा पूजा के समापन के रूप में मनाया जाता है. इस दिन देवी दुर्गा की मूर्तियों को भव्य जुलूस में पानी में विसर्जित किया जाता है. यह दिन देवी दुर्गा की महिषासुर राक्षस पर विजय का एक प्रतीक है. यह कहानी भी भारत में मनाए जा रहे दशहरा के संदेश से मेल खाती है की अच्छाई हमेशा बुराई पर भारी पड़ती है.

इंडोनेशिया में दशहरा

इंडोनेशिया के बाली और जावा जैसे द्वीपों में दशहरा काफी धूमधाम के साथ मनाया जाता है. यहां रामलीला का आयोजन होता है और रावण का वध भी किया जाता है. हालांकि इंडोनेशिया एक मुस्लिम बहुल देश है लेकिन यहां पर रामायण और महाभारत जैसे हिंदू महाकाव्यों का गहरा सांस्कृतिक संबंध है. इस दिन यहां पर नृत्य नाटक, कठपुतली शो और पुतला दहन का आयोजन किया जाता है.

श्रीलंका में दशहरा

श्रीलंका में तमिल समुदाय दशहरा काफी धूमधाम के साथ मनाता है. यहां के भी कई हिस्सों में रावण का पुतला दहन किया जाता है. इसी के साथ मंदिरों में विशेष समारोह आयोजित किए जाते हैं और परिवार भगवान राम की पूजा करते हैं. यहां पर दशहरे को रामायण के मंचन के साथ मनाया जाता है. रामायण के सभी किस्सों को नाटक के रूप में प्रस्तुत किया जाता है. दशहरा का त्योहार हमें यह सीख देता है की बुराई कितनी ही बड़ी क्यों ना हो अच्छाई के आगे घुटने टेक ही देती है.

 

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