06 June, 2026 (Saturday)

दिल्ली पुलिस ने ‘पारो’ को किया गिरफ्तार, अस्पतालों और मंदिरों में महिलाओं संग करती थी कांड

दिल्ली पुलिस ने महिला ठग पारो को बवाना से गिरफ्तार किया, जो अस्पतालों और मंदिरों में अकेली महिलाओं को निशाना बनाकर भरोसा जीतकर सोने के गहने ठगती थी। तीन साल से फरार पारो घोषित अपराधी थी।
नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक खास तरह के ठगी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए उसकी महिला सरगना पारो को गिरफ्तार किया है। ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, पारो पिछले करीब 3 साल से पुलिस से बचती फिर रही थी। उसे 9 अप्रैल को बवाना इलाके से एक सुनियोजित ऑपरेशन के तहत पकड़ा गया। पुलिस के मुताबिक, पारो को 2 मामलों में पहले ही ‘घोषित अपराधी’ घोषित किया जा चुका था। वह ठगी के कम से कम तीन बड़े मामलों में मुख्य आरोपी थी, जो आई.पी. एस्टेट और मंदिर मार्ग थानों में दर्ज हैं।
अकेली महिलाओं को निशाना बनाता था गिरोह
जांच में सामने आया कि यह गिरोह खासतौर पर उन महिलाओं को निशाना बनाता था जो अकेली या कमजोर होती थीं। ये आरोपी अस्पतालों और मंदिरों के आसपास जाकर पीड़ितों से बातचीत शुरू करते थे, मदद का दिखावा करते थे और अपनी झूठी कहानियों से उनका भरोसा जीत लेते थे। इसके बाद वे पीड़ितों को डर या अनहोनी का अहसास कराते थे और मानसिक रूप से प्रभावित करके उनसे सोने के गहने और कीमती सामान ठगकर मौके से फरार हो जाते थे।

LNJP अस्पताल में महिला से हुई थी ठगी
ऐसा ही एक मामला अप्रैल 2023 में सामने आया था, जब LNJP अस्पताल में एक महिला को इसी तरीके से फंसाकर उसके सोने के गहने ठग लिए गए थे। पुलिस ने इस मामले को सुलझाने के लिए करीब 50 जगहों के CCTV फुटेज खंगाले। तकनीकी निगरानी और स्थानीय जानकारी के आधार पर आखिरकार पारो को बवाना से गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस का कहना है कि गिरोह के बाकी फरार सदस्यों की तलाश जारी है और यह भी जांच की जा रही है कि पारो और उसके साथी किन-किन अन्य मामलों में शामिल रहे हैं।

EMI डेटा से ठगी करने वाला गैंग भी पकड़ाया
बता दें कि इससे पहले 29 मार्च को दिल्ली पुलिस ने पूर्वी दिल्ली में एक और गिरोह के 4 सदस्यों को गिरफ्तार किया था। ये लोग खुद को रिकवरी एजेंट बताकर वाहन मालिकों से पैसे वसूलते थे। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान प्रिंस, शिवम, टीटू और आकाश के रूप में हुई है, जो उत्तर प्रदेश के बागपत के रहने वाले हैं। इनकी गिरफ्तारी शकरपुर थाना पुलिस ने तकनीकी जांच और स्थानीय जानकारी के आधार पर की। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह ‘Easy Recovery App’ नाम के मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करता था, जिससे वे उन वाहनों की जानकारी निकालते थे जिनकी EMI बाकी होती थी।

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