11 March, 2026 (Wednesday)

चीन ईरान का 80% से ज्यादा तेल खरीदता है, लेकिन तेल संकट से नहीं है परेशान, आखिर कैसे की ऐसी तैयारी

विशेषज्ञों के अनुसार चीन होर्मुज में संभावित संकट के बावजूद कई अन्य देशों की तुलना में तेल आपूर्ति झटकों का बेहतर सामना कर सकता है। आज की तारीख में भी वहां कोई तेल संकट नहीं है। चीन ने अपनी ऊर्जा आपूर्ति को सिर्फ मध्य-पूर्व पर निर्भर नहीं रहने दिया।
ईरान से जुड़े संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ती अस्थिरता ने वैश्विक तेल बाजारों में भारी उथल-पुथल मचा दी है। दुनिया के कई देशों को आशंका है कि अगर इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में रुकावट आती है तो ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि चीन इस तरह के संकट से निपटने के लिए लंबे समय से तैयारी कर रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक बीजिंग ने पिछले करीब 20 वर्षों में एक व्यापक और बहुस्तरीय रणनीति तैयार की है, ताकि वैश्विक तेल आपूर्ति मार्गों में व्यवधान आने पर भी उसकी अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर न पड़े। इस रणनीति में बड़े रणनीतिक तेल भंडार बनाना, ऊर्जा आपूर्ति के स्रोतों का विविधीकरण, दीर्घकालिक ऊर्जा समझौते और वैश्विक बुनियादी ढांचे में निवेश जैसे कई अहम कदम शामिल हैं।
होर्मुज में संकट की आशंका से पहले ही तैयारी
चीन अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा मध्य-पूर्व से आयात करता है। ऊर्जा विश्लेषण फर्म Kpler के 2025 के आंकड़ों के अनुसार, चीन ईरान से भेजे जाने वाले तेल का 80 प्रतिशत से अधिक खरीदता है। पिछले साल चीन ने औसतन लगभग 13.8 लाख बैरल प्रतिदिन ईरानी तेल आयात किया, जो उसके समुद्री मार्ग से होने वाले कुल तेल आयात का करीब 13.4 प्रतिशत था।

दूसरी ओर होर्मुज जलडमरूमध्य से प्रतिदिन लगभग 2 करोड़ बैरल तेल गुजरता है, जो वैश्विक तेल खपत का करीब 20 प्रतिशत है। यही कारण है कि इस संकरे समुद्री मार्ग में किसी भी तरह का व्यवधान वैश्विक ऊर्जा बाजार को तुरंत प्रभावित कर सकता है। मौजूदा तनाव के चलते टैंकरों की आवाजाही घटने लगी है और तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच चुकी हैं।

विशाल रणनीतिक तेल भंडार
चीन की तैयारी का सबसे अहम हिस्सा उसके बड़े रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार हैं। पिछले दो दशकों में चीन ने देशभर में विशाल तेल भंडारण सुविधाएं विकसित की हैं, जिनमें करोड़ों बैरल कच्चा तेल संग्रहित किया जा सकता है। अनुमान है कि ये भंडार चीन को 100 दिनों से अधिक की तेल आपूर्ति सुनिश्चित करने में सक्षम हैं। इससे आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में देश को वैकल्पिक व्यवस्था करने के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है।

ऊर्जा स्रोतों का विस्तार
चीन ने अपनी ऊर्जा आपूर्ति को केवल मध्य-पूर्व पर निर्भर नहीं रहने दिया। इस दिशा में रूस बीजिंग का एक महत्वपूर्ण ऊर्जा साझेदार बनकर उभरा है। पाइपलाइन नेटवर्क और दीर्घकालिक समझौतों के जरिए चीन को रूस से सीधे तेल और गैस की आपूर्ति मिलती है, जिससे समुद्री मार्गों पर निर्भरता कम होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान से तेल आपूर्ति प्रभावित होती है तो चीन और रूस के बीच ऊर्जा सहयोग और मजबूत हो सकता है। इसके अलावा चीन ने अफ्रीका, मध्य एशिया और लैटिन अमेरिका से भी तेल आयात बढ़ाकर जोखिम को कई क्षेत्रों में विभाजित किया है।

ईरान के साथ दीर्घकालिक साझेदारी
ऊर्जा स्रोतों का विस्तार करने के बावजूद चीन ने ईरान के साथ अपने ऊर्जा संबंध बनाए रखे हैं। दोनों देशों के बीच 25 साल का रणनीतिक सहयोग समझौता हुआ है, जिसके तहत चीन ईरान के बुनियादी ढांचे और ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश करता है और बदले में उसे स्थिर तेल आपूर्ति मिलती है। इस समझौते के कारण चीन को भू-राजनीतिक तनाव के दौर में भी अपेक्षाकृत सस्ता ईरानी तेल मिलता रहता है।

बेल्ट एंड रोड से मजबूत ऊर्जा मार्ग
ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए चीन ने वैश्विक स्तर पर बुनियादी ढांचे में भारी निवेश किया है। बेल्ट एंड रोड पहल के तहत एशिया, मध्य-पूर्व और अफ्रीका में बंदरगाह, पाइपलाइन और परिवहन गलियारे विकसित किए गए हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य व्यापार बढ़ाने के साथ-साथ ऊर्जा आपूर्ति के वैकल्पिक मार्ग तैयार करना भी है। मध्य एशिया और रूस से आने वाली पाइपलाइनों ने समुद्री मार्गों पर चीन की निर्भरता काफी हद तक कम कर दी है।

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