अहमदाबाद में आसाराम के आश्रम के पास बुलडोज़र एक्शन, भारी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात
अहमदाबाद में आसाराम आश्रम के पास जमीन अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए प्रशासन बुलडोजर की कार्रवाई कर रहा है। आश्रम में रहने वाले लोगों ने इस कार्रवाई का विरोध किया है।
अहमदाबाद में आसाराम के आश्रम के पास बुलडोज़र एक्शन चल रहा है। 45 सौ वर्ग मीटर से ज़्यादा की ज़मीन खाली करवाई जा रही है। इस ज़मीन की कीमत 500 करोड रुपये से ज़्यादा है। आसाराम के मोटेरा आश्रम ट्रस्ट की तरफ से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी.. जिसके ख़ारिज होने के बाद अहमदाबाद विकास प्राधिकरण ने ये एक्शन लिया है। मौके पर भारी संख्या में पुलिस फोर्स की भी तैनाती की गई है। इस दौरान आश्रम में रहने वाले लोगों ने कार्रवाई का विरोध भी किया। लोगों को आश्रम छोड़कर जाना पड़ा है.. जिसकी वजह से गुस्सा बढ़ गया है। फिलहाल पुलिस हालात को कंट्रोल में कर रही है।
आज तोड़े जाएंगे 37 घर
डीसीपी जोन-2 भरत राठौड़ ने कहा कि आज नगरपालिका ने चांदखेड़ा में मोटेरा गांव के तहत आने वाले 37 घरों को तोड़ने की योजना बनाई है। इसके लिए चार टीमें तैनात की गई हैं और हर टीम के साथ पुलिस की टुकड़ी है। हर टीम में एक PI, दो PSI और 25 जवान शामिल हैं। रिज़र्व में भी एक PI, दो PSI और 25 अधिकारी तैनात हैं और पूरी कार्रवाई की देखरेख SP डिवीज़न कर रहा है। नगरपालिका ने सभी प्रक्रियाओं का पालन किया है, ज़रूरी मंज़ूरी ली है और निवासियों के साथ बैठकें भी की हैं।
हाई कोर्ट ने दिया था आदेश
बता दें कि गुजरात हाई कोर्ट की दो जजों की बेंच ने 16 अप्रैल 2026 को आसाराम आश्रम की अपील खारिज कर दी थी। इसके साथ ही, अहमदाबाद के मोटेरा इलाके में 45,000 वर्ग मीटर से ज़्यादा ज़मीन को वापस लेने का राज्य सरकार का रास्ता साफ़ हो गया। आश्रम ने अहमदाबाद ज़िला कलेक्टर के ज़मीन वापस लेने के आदेश के ख़िलाफ़ कानूनी रास्ता अपनाया था। यह ज़मीन अहमदाबाद में नरेंद्र मोदी स्टेडियम और सरदार पटेल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के ठीक बगल में है। यह ज़मीन ऐसी है जो 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स और ओलंपिक के आयोजन के लिए काम आ सकती है।
क्या है पूरा मामला
सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, लगभग 33,980 वर्ग मीटर ज़मीन आवंटित की गई थी। विवाद के केंद्र में रही ज़मीन दशकों पहले सीमित धार्मिक उपयोग के लिए कड़ी शर्तों के साथ आवंटित की गई थी। हालांकि, समय के साथ राज्य के अधिकारियों को पता चला कि आश्रम ने अपनी आवंटित सीमा से ज़्यादा ज़मीन पर कब्ज़ा कर लिया है।
सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, लगभग 33,980 वर्ग मीटर ज़मीन आवंटित की गई थी, लेकिन असल कब्ज़ा लगभग 50,000 वर्ग मीटर तक फैल गया था, जो बड़े पैमाने पर अतिक्रमण को दर्शाता है। इस मामले में दशकों पुराने ज़मीन के रिकॉर्ड, सर्वे शीट और नक्शों के ज़रिए तर्क दिए गए। राज्य की ओर से पेश सरकारी वकील जी. एच. विर्क ने ज़ोर देकर कहा, “राज्य की कार्रवाई निष्पक्षता, पारदर्शिता और कानून का सख्ती से पालन करने पर आधारित है।”
